AI : फ्रांस में हो रहे जी-7 समिट में इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर पूरा फोकस है. आज आखिरी दिन है. इस बार के G7 Summit में ओपन एआई हेड सैम ऑल्टमैन, एंथ्रॉपिक हेड डारियो अमोडेई और गूगल एआई चीफ डेमिस हसाबिस भी शामिल हैं. टोटल 13 अमेरिकी कंपनी के हेड यहां पहुंचे हैं. हर देश चाहता है कि उनके पास सॉवरेन AI हो. यानी अपने ही देश में तैयार किया गया फुल स्टैक एआई हो. लेकिन चूंकि अमेरिकी कंपनियों का डॉमिनेशन इस स्पेस में काफी है, इसलिए दूसरे मुल्क इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर अमेरिका एआई को कंट्रोल करेगा तो मुश्किल होगी. इतना ही नहीं अमेरिकी AI कंपनियां वहां की सरकार के साथ भी मिल कर काम करती हैं. ऐसे में चिंता ये भी है कि वहां की सरकार और कंपनियां कुछ जरूरी AI टूल दूसरे देशों को कभी नहीं देंगे जिससे उनका विकास दूसरे मुल्कों के मुकाबले कम होगा.
AI रेस में अमेरिका आगे
अमेरिका इस समय AI रेस में सबसे आगे माना जा रहा है. OpenAI, Google और Anthropic जैसी कंपनियां ऐसे मॉडल बना रही हैं जो दुनिया भर में इस्तेमाल हो रहे हैं. लेकिन अब खबर ये भी सामने आई है कि कुछ एडवांस AI मॉडल्स को लेकर कंट्रोल सख्त किया जा रहा है. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कुछ कंपनियों ने अपने सबसे पावरफुल मॉडल्स को सीमित कर दिया है ताकि सरकार के नियमों का पालन किया जा सके. यूरोपीय देश चाहते हैं कि AI टेक्नोलॉजी सिर्फ अमेरिका तक सीमित न रहे. उनका कहना है कि अगर AI का कंट्रोल कुछ कंपनियों या एक देश के पास रहा, तो आने वाले समय में टेक्नोलॉजी का बैलेंस बिगड़ सकता है. यही वजह है कि G7 में ट्रस्टेड पार्टनर्स यानी भरोसेमंद देशों को AI एक्सेस देने का आइडिया सामने आया है.
एआई पर अमेरिका का कब्जा, दूसरे देश मुश्किल में
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक जी-7 देशों के नेता इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि एडवांस एआई टेक्नोलॉजी तक किसे और कैसे पहुंच दी जाए. खासतौर पर अमेरिका के पास मौजूद कटिंग-एज एआई मॉडल्स को लेकर यूरोप और दूसरे देशों में चिंता बढ़ रही है. सवाल ये है कि क्या ।प् पर एक ही देश का कंट्रोल रहेगा या बाकी देशों को भी बराबर मौका मिलेगा. ऐसा माना जा रहा है कि जिस देश के पास बेहतर AI होगा, वही आने वाले समय में अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और डिजिटल दुनिया में आगे रहेगा.
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