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डिजिटल दोस्ती से फैलता कामकाजी दुनिया और महिलाओं का दायरा

technology and women

women: अब महिलाओं की दोस्तियां नए रास्ते तय कर रही हैं, जिसमें सबसे बड़ा योगदान व्हाट्सएप ग्रुप का है। अब महिलाओं को एक-दूसरे का हालचाल जानने के लिए फोन करने या सीधे मुलाकात का इंतजार नहीं करना पड़ता। स्मार्टफोन ने व्हाट्सएप ग्रुप की जो सुविधा दी है, उसमें शामिल हर किसी के सुख-दुख का पता चलता रहता है।

सोशल लाइफ के साथ आर्थिकी में सुधार

आज व्हाट्सएप ग्रुप महिलाओं की सोशल लाइफ का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं और ये रिश्ते केवल हाल-चाल जानने तक ही सीमित नहीं हैं, कई तरह की आर्थिक गतिविधियों को भी इनके जरिये अंजाम दिया जाता है। इसलिए यह सिर्फ भावनात्मक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि आर्थिक सेहत भी सुधारते हैं। हजारों ऐसे उदाहरण हैं, जब इस तरह के व्हाट्सएप ग्रुप से महिलाओं ने हर महीने साड़ियां, सूट, आर्टिफिशियल ज्वैलरी, अचार, मुरब्बा, पापड़ आदि का अच्छा-खासा कारोबार भी किया है। इसलिए महिलाओं की सोशल लाइफ के लिए व्हाट्सएप ग्रुप महत्वपूर्ण बनकर उभरे हैं।

अलग-अलग तरह के व्हाट्सएप ग्रुप

इस डिजिटल युग में दोस्तियां केवल मिलने-जुलने तक सीमित नहीं होतीं। सुबह की शुभकामना से लेकर रात की बातचीत तक दिनभर कोई न कोई इंगेजमेंट बनी रहती है। परिवार, स्कूल फ्रेंड्स, कालोनी, ऑफिस, योगा क्लास, किट्टी ग्रुप, किचन गार्डेनिंग या बुक क्लब, हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुप मौजूद हैं। दिलचस्प बात ये है कि इन ग्रुप्स ने महिलाओं की दोस्ती को ही नहीं बढ़ाया बल्कि उसके स्वरूप को भी बदला है। अनेक महिलाएं आपस में भावनात्मक अनुभवों को साझा करती हैं। एक-दूसरे से सलाह लेती-देती हैं। अपनी रेसिपी दूसरों को बताती हैं और दूसरों द्वारा बतायी गई रेसिपी को आजमाने की कोशिश करती हैं। व्यक्तिगत उपलब्धियां, स्वास्थ्य संबंधी जानकरियां, ये सब होता है। यानी व्हाट्सएप ग्रुप ने खासकर गृहिणियों के लिए एक भरी-पूरी दुनिया रच दी है, जो पहले उससे वंचित थीं।

अकेलेपन में भावनात्मक संबल

संबंध यानी रिलेशनशिप विशेषज्ञों के मुताबिक डिजिटल संवाद ने किसी हद तक महिलाओं में अकेलेपन की भावना को कम किया है। हालांकि देखने में यह भी आया है कि डिजिटल इंगेजमेंट ने घर के लोगों के बीच में दूरियां बढ़ा दी हैं। लेकिन अपनी तरह की सोच व समझ रखने वाली महिलाओं के बीच जरूर महिलाओं की पहुंच बढ़ी है। भले यह वास्तविक के बजाय आभासी हो। हालांकि फेसबुक या इंस्टाग्राम जितनी व्हाट्सएप ग्रुप की दुनिया आभासी नहीं होती। क्योंकि व्हाट्सएप समूहों में 99 फीसदी एक-दूसरे को जानने वाले होते हैं। इसलिए यह पूरी तरह से आभासी या अवास्तविक नहीं है। फिर भी एक जीवंत दुनिया से कुछ कम तो है ही। लेकिन इस जुड़ाव का महिलाओं को अच्छा-खासा फायदा और कुछ थोड़े से नुकसान भी होते हैं। मसलन पहले घर और जिम्मेदारियों के बीच ज्यादातर महिलाएं खास करके गृहिणियां सामजिक रूप से अलग-थलग महसूस करती थीं, लेकिन अब वह किसी भी समय अपनी मित्र-मंडली या अपनी जैसी दूसरी महिलाओं से सामाजिक रूप से घुल-मिल सकती हैं।

ऑनलाइन बिजनेस और स्किल की सीख

छोटी-छोटी बातचीतें भी हमें मानसिक राहत देती हैं और महिलाएं तो इस तरह का मानसिक सुकून का अहसास करने में वैसे भी बेहद सकारात्मक होती हैं। इसलिए ये व्हाट्सएप ग्रुप महिलाओं के लिए काफी उपयोगी साबित हुए हैं। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद, वे दोस्तों व परिवार से संपर्क बनाये रख पाती हैं। साथ ही अनेक महिलाएं पेशेवर नेटवर्किंग, ऑनलाइन बिजनेस और नई स्किल सीखने के मामले में भी इन समूहों से लाभान्वित होती हैं। घर से छोटे व्यवसाय चलाने वाली महिलाओं के लिए तो व्हाट्सएप सचमुच एक बड़ा मंच बन गया है। जानकारों के मुताबिक महिलाओं के ग्रुप्स में पुरुषों के मुकाबले कहीं ज्यादा भावनात्मक जुड़ाव भी महसूस होता है। महिलाएं अपने ग्रुप की महिलाओं से छोटी-छोटी सूचनाएं भी साझा करती हैं और अपने लिए तथा दूसरों के लिए एक ऐसा सपोर्ट सिस्टम विकसित करती हैं, जिससे बीमारी, तनाव, बच्चों की पढ़ाई, रिश्तों की समस्याएं या किसी खास उपलब्धि की खुशी को आपस में बांटने का भरपूर सुख और राहत पाती हैं।

सांस्कृतिक जुड़ाव के मंच

त्योहारों और विशेष अवसरों पर तो इन समूहों की भूमिका कुछ और ही बढ़ जाती हैं। करवा चौथ, तीज जैसे त्योहारों में एक-दूसरे को डिजिटल शुभकामनाओं के साथ-साथ ये आपस में मिलकर इन मौकों को सेलिब्रेट करने, सजावट, फैशन, महंगे डिजाइन और रेसिपी को साझा करके अपनी-अपनी तरह से समृद्ध होती हैं। इससे आपस में सांस्कृतिक जुड़ाव भी मजबूत होता है। हालांकि इन सारी गतिविधियों के अपने कुछ नकारात्मक पहलू भी हैं। जैसे कई बार अनावश्यक संदेश भी इन समूहों के जरिये एक-दूसरे के पास फारवर्ड होते रहते हैं। कुछ ग्रुप सोशल फटीग या सामाजिक थकान भी पैदा करते हैं। कुछ महिलाएं सोशल मीडिया पर दूसरों की परफेक्ट लाइफ देखकर हीनभावना का भी शिकार हो जाती हैं।

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