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कंपनियों को अब भारी पड़ रही है AI तकनीक, सैलरी से ज्यादा आ रहा है बिल

AI technic is heavy

AI code: AI तकनीक का पिछले कुछ सालों से पूरी दुनिया में शोर मचा है। कहा जा रहा है यह इंसानों की नौकरियां खा जाएगा और कंपनियों का अरबों रुपया बचाएगा। इसके लिए दुनिया भर की ज्यादातर टेक कंपनियां ने जल्दी काम पूरा हो और साथ में मुनाफा भी हो की सोच कर अपने कर्मचारियों की छंटनी की और अपने ऑफिस को एआई रोबोट्स और कोडिंग एजेंट्स के हवाले कर दिया। लेकिन, अब स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. जो कंपनियां कल तक एआई को किफायती मान रही थीं, उनके होश अब उड़ चुके हैं. दरअसल, दफ्तरों से इंसानों को निकालकर जिन एआई एजेंट्स को काम पर रखा गया था, उनके बिल कर्मचारियों की सैलरी से भी ज्यादा आ रहा है.

क्या है बढ़ते बिलों की असली वजह?

एक रिपोर्ट के मुताबिक एआई को चलाने का खर्च अब कर्मचारियों की सैलरी से भी कहीं ज्यादा आने लगा है. टेक कंपनियों में इंजीनियर्स एक साथ कई एआई कोडिंग एजेंट्स का इस्तेमाल करते हैं, जिससे टोकन की खपत बहुत तेजी से बढ़ जाती है और कंपनियों के बिल आउट ऑफ कंट्रोल हो रहे हैं. ज्यादातर एआई सिस्टम टोकन के आधार पर चार्ज करते हैं. जब भी एआई कोई कोड लिखता है, गड़बड़ियां ठीक करता है या किसी डॉक्यूमेंट को रीव्यू करता है, तो वह टोकन का इस्तेमाल करता है। परेशानी तब और बढ़ जाती है, जब इंजीनियर्स बैकग्राउंड में एक साथ कई एआई एजेंट्स से काम लेने लगते हैं. टेक कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि मेरी टीम के लिए, कंप्यूटर का खर्च अब कर्मचारियों की सैलरी की लागत से कहीं ज्यादा हो चुका है.

कंपनियों में आया नया ट्रेंड

एआई के बढ़ते क्रेज के बीच डेवलपर्स में टोकनमैक्सिंग नाम का एक नया ट्रेंड शुरू हुआ है. इसका मतलब है कि इंजीनियर्स अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाने या नए एक्सपेरिमेंट करने के लिए हर दिन लाखों टोकन खर्च कर रहे हैं. लाखों में आ रहे हैं बिल – मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ हैवी यूजर्स का महीने का एआई बिल 150,000 डॉलर यानी लगभग 1.25 करोड़ रुपये को भी पार कर गया है. स्टॉकहोम के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर मैक्स लिंडर के मुताबिक वह अपनी सैलरी से ज्यादा पैसा अकेले क्लाउड एआई पर खर्च कर देते हैं.

एक रिपोर्ट के मुताबिक उबर के इंजीनियर्स के एंथ्रोपिक के क्लॉड कोड का इतना इस्तेमाल किया कि कंपनी का साल 2026 का पूरा एआई बजट ही समय से पहले खत्म हो गया.

टेक कंपनियों में धड़ल्ले से बन रहा है AI कोड

बढ़ते खर्च के बाद भी कंपनियों में एआई का इस्तेमाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. एंथ्रोपिक के क्लॉड कोड के हेड बोरिस चेर्नी का कहना है कि उनकी कंपनी का करीब 100ः कोड अब एआई जनरेटेड है. वहीं, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों में भी लगभग 25 प्रतिशत कोड एआई की मदद से तैयार हो रहा है. मेटा ने तो कर्मचारियों के परफॉर्मेंस रिव्यू में भी एआई के इस्तेमाल को जोड़ना शुरू कर दिया है.

फिर किसका हो रहा फायदा?

कंपनियों के बढ़ते बिलों से एआई बनाने वाली कंपनियों जैसे ओपन एआई, माइक्रोसोफ्ट को फायदा हो रहा है. बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनियों ने अपने दाम बढ़ाने और बिलिंग के तरीके बदलने शुरू कर दिए हैं. माइक्रोसॉफ्ट ने अपने गिटहब कोपायलट के लिए यूसेज बेस्ट बिलिंग यानी जितना इस्तेमाल, उतना पैसा की शुरुआत कर दी है.

 

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