Bengal Politics:पश्चिम बंगाल में आज शनिवार को सुवेंदु अधिकारी ने बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है. दिलीप घोष, अग्रिमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टु़डू और निषिथ प्रमाणिक ने मंत्री पद की शपथ ली है. नई सरकार बनने के साथ ही बंगाल में सियासी बयानबाजी का दौर तेज हो गया है. तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि हमने एक बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण चुनाव लड़ा, जिसमें लगभग 30 लाख वास्तविक मतदाताओं को कथित तौर पर मतदाता सूची से वंचित कर दिया गया. पूरे चुनावी प्रक्रिया के दौरान हमें ऐसा महसूस हुआ कि कई सरकारी एजेंसियों और भारत निर्वाचन आयोग का रवैया निष्पक्ष न होकर पक्षपातपूर्ण था. जो लोकतांत्रिक संस्थाएं निष्पक्ष रूप से काम करने के लिए बनाई गई हैं, उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. इससे पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और पारदर्शिता को लेकर जनता के मन में गहरी चिंता पैदा हुई है.
We have fought an extremely difficult election where nearly 30 lakh genuine voters were allegedly disenfranchised from the electoral rolls. Throughout this entire process, we witnessed what we believe was deeply partisan conduct by several government agencies as well as the…
— Abhishek Banerjee (@abhishekaitc) May 9, 2026
“हिंसा की खबरें बेहद चिंताजनक-लोकतंत्र के लिए अस्वीकार्य”
अभिषेक बनर्जी ने पोस्ट में आगे लिखा कि मतगणना प्रक्रिया से लेकर ईवीएम की हैंडलिंग और मूवमेंट, कंट्रोल यूनिट्स में कथित गड़बड़ी और कई अन्य घटनाओं ने लाखों लोगों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या जनता के असली जनादेश का सम्मान हुआ है. मैंने पहले ही मतगणना केंद्रों की CCTV फुटेज सार्वजनिक करने और VVPAT पर्चियों की पारदर्शी गिनती कराने की मांग की है, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके और हर संदेह का खुलकर व ईमानदारी से समाधान हो सके. लोकतंत्र तभी मजबूत रह सकता है जब चुनावी संस्थाओं पर जनता का भरोसा कायम रहे, दुर्भाग्य से, जो कुछ हमने देखा है उसने इस विश्वास को गहराई से हिला दिया है. इसके साथ ही, चुनाव के बाद हिंसा, पार्टी कार्यालयों पर हमले, हमारे कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने और समर्थकों के खिलाफ हिंसा की खबरें बेहद चिंताजनक और लोकतंत्र के लिए अस्वीकार्य हैं. कई समर्पित तृणमूल कार्यकर्ता और समर्थक, जिन्होंने ज़मीन पर पूरी ताकत से संघर्ष किया, कथित तौर पर निशाना बनाए गए और भय के कारण अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए.लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक कार्यकर्ता को अपनी सुरक्षा और अपने राजनीतिक विचारों में से किसी एक को चुनने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए.
“चुनावी तंत्र के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ाई लड़ी”
TMC नेता ने आगे लिखा कि इस महान राष्ट्र की लोकतांत्रिक परंपराओं को सर्वोपरि रखते हुए, मैं और मेरे सहयोगी तृणमूल कांग्रेस में पश्चिम बंगाल की जनता और उन सभी तृणमूल कार्यकर्ताओं के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे जिन्होंने कथित रूप से समझौता किए गए चुनावी तंत्र के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ाई लड़ी. हम दिल्ली और पश्चिम बंगाल-दोनों जगह एक मजबूत, मुखर और समझौता न करने वाला विपक्ष बने रहेंगे. ममता बनर्जी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में लोकतंत्र, संवैधानिक मूल्यों तथा जनता के अधिकारों और सम्मान की हमारी लड़ाई बिना किसी डर और बिना किसी समझौते के जारी रहेगी.
उन्होंने आगे लिखा कि मैं हर तृणमूल समर्थक और कार्यकर्ता से अपील करता हूं कि इस कठिन समय में मजबूत और एकजुट बने रहें. यदि किसी के साथ चुनाव बाद हिंसा, धमकी या डराने-धमकाने की घटना हुई है, तो वे मुझसे संपर्क करें या मुझे डायरेक्ट मैसेज करें. मैं अपनी पूरी क्षमता से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और हर कानूनी व लोकतांत्रिक रास्ते पर लड़ाई लड़ने का प्रयास करूंगा. मैं हर तृणमूल कार्यकर्ता और समर्थक के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहूंगा, ताकि सच्चाई सामने आए और दोनों सरकारें वास्तव में पश्चिम बंगाल की जनता के हित में काम करें.



