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विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्री देना समाज के साथ धोखा, राज्यपाल बागडे ने उड़ाई शिक्षा माफियाओं की नींद

Rajyapaal baagde

Rajyapaal : राजस्थान के राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े ने फर्जी डिग्री के मुद्दे पर कहा है कि फर्जी डिग्री समाज के साथ धोखा है यह खेल लंबे समय से चल रहा है और अब तो अपराधी जेल भी जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई फर्जी डिग्री लेकर डॉक्टर बन जाए, तो उसके पास आने वाले मरीजों का क्या होगा? राज्यपाल ने कहा कि ऐसा डॉक्टर खुद के परिवार के बीमार होने पर उन्हें दूसरे डॉक्टर के पास भेजेगा क्योंकि उसे अपनी योग्यता पता है। यह समाज के साथ धोखा है। राज्यपाल बुधवार को अलवर पहुंचे। वे मत्स्य विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह में भाग लेने के लिए विशेष रूप से हेलीकॉप्टर से अलवर और फिर विश्वविद्यालय के प्रताप ऑडिटोरियम पहुंचे। समारोह में उनके साथ नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल ने मेधावी विद्यार्थियों को मेडल और उपाधियां प्रदान कीं, लेकिन उनके संबोधन ने शिक्षा माफियाओं की नींद उड़ा दी।

 यहां कोई फेल ही नहीं होता

राजस्थान और महाराष्ट्र की तुलना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि राजस्थान की जनसंख्या 8 करोड़ है और यहाँ 52 विश्वविद्यालय हैं, जबकि महाराष्ट्र की 12 करोड़ की आबादी पर केवल 26 विश्वविद्यालय हैं। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि यही कारण है कि बाहर के लोग यहां पढ़ने आते हैं, क्योंकि यहां कोई फेल नहीं होता, सब पास हो जाते हैं। लेकिन फर्जी डिग्री देने वाले संस्थानों को अब बंद होना पड़ेगा। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करो, उन्हें सिर्फ अच्छी और वास्तविक शिक्षा दो।

कुलगीत याद नहीं तो काटें नंबर

राज्यपाल उस समय नाराज दिखे जब विश्वविद्यालय का कुलगीत बज रहा था। उन्होंने कहा कि मैंने देखा कि गीत बजते समय न तो किसी शिक्षक का और न ही किसी विद्यार्थी का मुँह हिल रहा था। इसका मतलब किसी को गीत याद नहीं है। उन्होंने कुलगुरु को निर्देश दिया कि कुलगीत के लिए अलग से मार्क्स रखे जाएं और जो छात्र इसे न सुना पाए, उसके नंबर काट लिए जाएं।

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डिग्री और ज्ञान में अंतर 

राज्यपाल ने छात्रों को जीवन का मूल मंत्र देते हुए कहा कि शिक्षा का असली मतलब ज्ञान का विस्तार है, केवल कागज का टुकड़ा (डिग्री) हासिल करना नहीं। उन्होंने कहा कि बौद्धिक क्षमता को मापने का कोई ऐसा मीटर नहीं बना है जो दिमाग को छूते ही बता दे कि इसमें कितना ज्ञान है। बौद्धिक ज्ञान होना आवश्यक है। सिर्फ किताबें पढ़ लेना काफी नहीं है। राज्यपाल ने शिक्षकों से भी गुजारिश की कि वे बच्चों का फाउंडेशन मजबूत करें। उन्होंने चिंता जताई कि वर्तमान में शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच की खाई बढ़ती जा रही है, जबकि बच्चों को अपने गुरुओं का अनुसरण करना चाहिए।

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71 मेधावियों का हुआ सम्मान

कुलगुरु प्रो. रमन कुमार दवे के अनुसार दीक्षांत समारोह में सत्र 2024-25 के 71 टॉपर स्टूडेंट्स शामिल हैं। इनमें 01 चांसलर मेडल (सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए), 37 गोल्ड मेडल, 05 सिल्वर मेडल, 28 पीएचडी उपाधियां शामिल हैं। राज्यपाल ने सभी मेधावियों को बधाई देते हुए उनसे अपेक्षा की कि वे अपने अर्जित ज्ञान को व्यवहार में उतारकर समाज के काम आएंगे।

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