Narendra Modi: राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों के विदाई भाषण में कहा कि यह एक ऐसा अवसर है जो हर दो साल में हमें इस सदन में भावुक पलों में डुबो देता है. इस विशेष अवसर पर आने मुझे भावनाएं प्रकट करने का अवसर दिया. इसके लिए मैं आभारी हूं. सभापति जी सदन के अंदर अनेक विषयों पर चर्चाएं होती है. हर किसी का महत्वपूर्ण योगदान होता है, कुछ खट्टे मीठे अनुभव भी होते हैं. जब ऐसा अवसर आता है तो स्वाभाविक रूप दलगत से ऊपर उठकर हम सभी के मन में एक भाव आता है कि हमारे साथी अब किसी ओर विशेष काम के लिए आगे बढ़ रहे हैं. जो साथी फिर से आने के लिए विदाई ले रहे हैं और कुछ समाज में विशेष योगदान देने जा रहे हैं.
“राजनीति में कोई फुलस्टॉप नहीं होता”
प्रधानमंत्री (Narendra Modi) ने कहा कि यह हमारे साथी अब किसी और विशेष काम के लिए आगे बढ़ रहे हैं. यहां से जो साथी विदाई ले रहे हैं, कुछ फिर से आने के लिए विदाई ले रहे हैं और कुछ विदाई के बाद यहां का अनुभव लेकर समाज जीवन में कुछ न कुछ विशेष योगदान के लिए जा रहे हैं. जो वापस सदन में आने वाले नहीं हैं, उनको भी मैं कहना चाहूंगा कि राजनीति में कोई फुलस्टॉप नहीं होता. भविष्य आपका इंतजार कर रहा है, आपका अनुभव और आपका योगदान राष्ट्र जीवन में हमेशा बना रहेगा.
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“हमारे अठावले जी एवरग्रीन हैं”
उन्होंने (Narendra Modi) कहा कि जाने वाले सभी सांसदों का उत्तम योगदान है. मैं जरूर कहूंगा कि देवगौड़ा जी, खरगे जी, शरद पवार जी ऐसे वरिष्ठ लोग हैं जिनके जीवन का आधे से अधिक उम्र संसदीय कार्य प्रणाली में गई है. इतने लंबे अनुभव के बाद भी सभी नए सांसदों ने सीखना चाहिए, वैसे समर्पित भाव से सदन में आना, योगदान करना. समाज से जो जिम्मेदारी मिली है उसके प्रति समर्पित रहना सब वरिष्ठ लोगों से सीखने जैसा है. कभी-कभी हम सुनते थे कि सदन में ह्यूमर और सटायर के लिए बहुत मौके हैं. आजकल शायद यह धीरे-धीरे कम हो रहा है. लेकिन हमारे अठावले जी एवरग्रीन हैं. अठावले जी जा रहे हैं लेकिन यहां किसी को कोई कमी महसूस नहीं होगी. मुझे पूरा भरोसा है कि वे सटायर और ह्यूमर की भरपूर सेवा करते रहेंगे.
“परंपरा और विरासत निरंतर बनी रहती है”
पीएम मोदी (Narendra Modi) ने कहा कि सदन में हर दो साल के अंतराल के बाद एक बड़ा समूह हमारे बीच से चला जाता है, लेकिन यह व्यवस्था ऐसी है कि जो नया समूह आता है, उसे पहले से मौजूद अनुभवी सदस्यों से सीखने का अवसर मिलता है. इस प्रक्रिया के माध्यम से सदन की परंपरा और विरासत निरंतर बनी रहती है, जो एक बड़ा लाभ है.



