Holi Date confirm: राजस्थान में होलिका दहन 2 और 3 मार्च के मध्य रात के समय होगा। तीन मार्च को चंद्रग्रहण होने के कारण रंगों का त्यौहार नहीं मनाने की भ्रांति दूर करते हुए आचार्य आशुतोष भारद्वाज ने कहा कि यह सिर्फ एक भ्रांति है, चंद्रग्रहण का कोई खास प्रभाव नहीं पडेगा और होली तीन मार्च मंगलवार को मनाई जाएगी।
घुलंडी 3 मार्च को ही
होलिका दहन ओर रंगों की होली की डेट को लेकर भ्रम दूर करते हुए प्रमुख ज्योतिषाचार्य आशुतोष भारद्वाज ने बताया कि होलिका दहन की तिथि को लेकर लोगों में व्याप्त भ्रम है कुछ लोग 3 मार्च को होली जलाने की बात कर रहे हैं, जबकि सही तिथि 2 मार्च ही है। फाल्गुन पूर्णिमा जब प्रदोष काल में रहती है, उसी दिन होलिका दहन किया जाता है। धुलंडी होलिका दहन के ठीक अगले दिन सूर्यास्त से पहले मनाई जाती है। इस बार 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 55 मिनट से सूतक शुरू हो जाएगा, जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति बनी है। धुलंडी होलिका दहन के अगले दिन ही मनाई जाएगी। चंद्रग्रहण के सूतक का इस पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा।
प्रदोष काल में पूर्णिमा नहीं रहेगी
इस साल पूर्णिमा 2 मार्च को शाम 5 बजकर 56 मिनट से शुरू होकर 3 मार्च को शाम 5 बजकर 8 मिनट तक रहेगी। चूंकि 3 मार्च को सूर्यास्त से पहले पूर्णिमा समाप्त हो जाएगी, इसलिए उस दिन प्रदोष काल में पूर्णिमा नहीं रहेगी। इसी कारण 2 मार्च को ही होलिका दहन का निर्णय शास्त्र सम्मत है। 2 मार्च की रात भद्रा का प्रभाव रहेगा और भद्रा में होलिका दहन नहीं किया जाता है। लेकिन भद्रा के मुख को छोड़कर पुच्छ में दहन करना श्रेष्ठ माना गया है। इसलिए 2 मार्च की अर्धरात्रि के बाद यानी 3 मार्च की रात 1 बजकर 26 मिनट से 2 बजकर 38 मिनट के बीच होलिका दहन करना सर्वश्रेष्ठ रहेगा।
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2 और 3 मार्च को होली का अवकाश
राजस्थान सरकार ने होली के अवसर पर 2 मार्च को होलिका दहन और 3 मार्च को धुलंडी का अवकाश घोषित किया है। हालांकि, केंद्र सरकार के अवकाश कैलेंडर में 3 मार्च को होलिका दहन (वैकल्पिक अवकाश) और 4 मार्च को होली का राजपत्रित अवकाश दर्शाया गया है।
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गोविंददेवजी में फूलों की होली
जयपुर के प्रसिद्ध श्री गोविंददेवजी मंदिर में 2 मार्च को रंगों और फूलों की होली होगी। मंदिर में 2 मार्च को सुबह 10 बजकर 30 मिनट से पारंपरिक तरीके से होली उत्सव शुरू होगा। सबसे पहले ठाकुर जी को मंदिर महंत अंजन गोस्वामी फूलों की होली अर्पित करेंगे। इसके बाद गुलाल अर्पित किया जाएगा। मंदिर परिसर में भक्त चंग की थाप और पारंपरिक गीतों के साथ दिन भर रंगों की होली खेलेंगे। 3 मार्च को सत्यनारायण पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण रहेगा।
समय सारिणी
सूतक सूर्याेदय करीब सुबह 6.55 बजे से शुरू हो जाएगा। ग्रहण पर्वकाल दोपहर 3.21 बजे से शाम 6.47 बजे तक रहेगा, कुल अवधि 4 घंटे 26 मिनट रहेगी। इस दिन मंगला झांकी सुबह 4.00 से 6.30 बजे तक, धूप दर्शन सुबह 7.00 से 8.45 बजे तक, श्रृंगार सुबह 9.30 से 10.15 बजे तक और राजभोग सुबह 10.45 से 11.30 बजे तक होंगे। ग्रहणकाल विशेष दर्शन दोपहर 3.15 बजे से शाम 6.50 बजे तक रहेंगे। इसके बाद ग्वाल, संध्या और शयन दर्शन ग्रहण के कारण नहीं होंगे। 3 मार्च को भी भीड़ को देखते हुए देवउठनी एकादशी और दीपावली की तरह ही दर्शन व्यवस्था लागू रहेगी। प्रवेश जलेब चौक से और निकास जय निवास उद्यान से रहेगा। मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ग्रहणकाल के विशेष दर्शन के बाद अगले नियमित दर्शन 4 मार्च को सुबह मंगला झांकी में होंगे। 4 मार्च को दर्शनार्थियों की भीड़ को देखते हुए होली की तरह दर्शन व्यवस्था की गई है। सभी दर्शनार्थियों का प्रवेश जलेब चौक से होते हुए मन्दिर मुख्य द्वार से होगा। दर्शन के बाद सभी दर्शनार्थी जय निवास उद्यान से बाहर निकल सकेंगे।



