Corruption in Judicial: न्यायिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार को लेकर NCERT की कक्षा आठ की किताब में दिए एक अध्याय पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने किताब पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की आपत्ति के बाद ज्यूडीशियल करप्शन’ चैप्टर वाली NCERT किताब पर मुख्य न्यायधीश ने इस पर आपत्ति जताई थी। सीजेआई ने बुधवार को कहा कि दुनिया में किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। मैं यह केस खुद हैंडल करूंगा। सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने अभिषेक सिंघवी के साथ सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस विपुल एम पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने यह मामला उठाया था।
कपिल सिब्बल ने उठाया मामला
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बताया कि एनसीआरटी के क्लास 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा है। यह बहुत निंदनीय है। सिंघवी ने कहा कि किताब में राजनीति, ब्यूरोक्रेसी और अन्य संस्थानों में भ्रष्टाचार का कोई जिक्र नहीं है। एनसीआरटी ने मान लिया है कि और जगह भ्रष्टाचार है ही नहीं। इसपर सीजेआई ने कहा कि मुझे इसकी जानकारी है। यह एक सोची-समझी और गहरी साजिश लगती है। मुझे पता है इससे कैसे निपटना है। हम इस बारे में और कुछ नहीं कहना चाहते। जस्टिस बागची ने कहा कि किताब में संविधान की मूल संरचना की संवैधानिक अखंडता का अभाव है।
नई सोशल साइंस टेक्स्टबुक में चैप्टर था
NCERT ने 23 फरवरी को क्लास 8 के स्टूडेंट्स के लिए सोशल साइंस की नई टेक्स्टबुक जारी की थी। ये किताब एकेडमिक सेशन 2026-27 से स्कूलों में पढ़ाई जानी थी। इसका पहला पार्ट जुलाई 2025 में रिलीज किया गया था।
किताब का नाम ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी- इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2’ है। इसमें ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ चैप्टर के अंदर ‘करप्शन इन द ज्यूडिशियरी’ का टॉपिक जोड़ा गया है।
क्या कहा गया चैप्टर में
इसमें कहा गया है कि भ्रष्टाचार, बड़ी संख्या में पेंडिंग मामले और जजों की भारी कमी ज्यूडिशियल सिस्टम के सामने प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं। जज आचार संहिता से बंधे होते हैं, जो न केवल कोर्ट में उनके व्यवहार को कंट्रोल करता है, बल्कि कोर्च के बाहर उनके आचरण को भी तय करती है। किताब के एक सेक्शन का टाइटल ‘Justice delayed is justice denied’ है। इसका मतलब है- इंसाफ में देरी इंसाफ न मिलने जैसा है। यहां सुप्रीम कोर्ट में 81 हजार, हाईकोर्ट्स में 62 लाख 40 हजार, डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट के 4 करोड़ 70 लाख पेंडिंग केस की संख्या भी बताई गई है। चैप्टर में लिखा है कि लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग लेवल पर करप्शन का सामना करते हैं। गरीबों और जरूरतमंदों की न्याय तक पहुंच की समस्या और बिगड़ सकती है। यह भी बताया है कि राज्य और केंद्र ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक ट्रस्ट को मजबूत करने की कोशिशें कर रहे हैं। इसमें टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल और करप्शन के मामलों के खिलाफ फास्ट एक्शन लेना शामिल है।
किताब में पूर्व CJI गवई का भी जिक्र
किताब में भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई का भी जिक्र है, जिन्होंने जुलाई 2025 में कहा था कि ज्यूडिशियरी के अंदर करप्शन और गलत कामों के मामलों का पब्लिक ट्रस्ट पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा था, हालांकि, इस ट्रस्ट को फिर से बनाने का रास्ता इन मुद्दों को सुलझाने के लिए उठाए गए तेज, निर्णायक और ट्रांसपेरेंट एक्शन में है… ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी डेमोक्रेटिक गुण हैं।
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NCERT की किताब वेबसाइट पर मौजूद नहीं
NCERTछब्म्त्ज् की 8वीं क्लास की सोशल साइंस का पार्ट 2 इसी हफ्ते जारी हुआ था। ब्श्रप् की टिप्पणी के बाद ये किताब छब्म्त्ज् की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है। एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक किताबों की ऑफलाइन बिक्री भी मंगलवार 24 फरवरी से बंद कर दी गई है। हालांकि अब तक छब्म्त्ज् की तरफ इसको लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
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