US-Israel Attack Iran: कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने सोमवार को मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि जो भारतीय इज़राइल और ईरान में हैं उनको निकालने की जिम्मेदारी भारत सरकार की है. इज़राइल में आपने भारतीयों को भेजा क्यों था? क्या आपको पता नहीं था कि क्या हालात हैं. ये दुर्भाग्यपूर्ण है इसके लिए भारत सरकार जिम्मेदार है. सवाल ये है कि देश का प्रधानमंत्री अब तक क्यों खामोश है. ईरान से हमारी पुरानी दोस्ती रही है, ईरान हर मौके पर हमारे साथ खड़ा रहा है. उनके सुप्रीम लीडर अली हुसैनी खामेनेई को शहीद कर दिया और हमारा प्रधानमंत्री खोमाश है क्यों खोमाश है.
“वो ईरान की हिमायत में खड़े नहीं हुए”
राशिद अल्वी ने आगे कहा कि क्या मदरलैंड का प्रधानमंत्री फादरलैंड के खिलाफ बोल नहीं सकता है. इज़राइल को वो फादरलैंड मानते हैं इसलिए वो ईरान की हिमायत में खड़े नहीं हुए. मैं ये सवाल पहले भी उठा चुका है जब प्रधानमंत्री इज़राइल में थे, तो आम-आदमियों में ये चर्चा थी कि भारत के प्रधानमंत्री जैसे ही इजराइल छोड़ेंगे, इज़राइल ईरान पर हमला कर देगा. ये मुमकिन नहीं है पीएम मोदी को इजराइल में होते हुए ये मालूम ना हो कि इजराइल ईरान पर हमला करने वाला है. अगर आपको इस बारे में मालूम था और वहां के प्रधानमंत्री नेतन्याहू से बात हुई थी और हमें शक है कि आपकी बात हुई थी तो भारत जानना चाहता है आपकी क्या बातचीत हुई थी, नेतन्याहू से ईरान से जंग के बारे में किस तरीके की बातचीत हुई थी. देश को बताइये, इसपर आप अगर खोमाश रहेंगे तो देश को शक होगा.
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“इज़राइल एक आतंकी मुल्क है”
कांग्रेस नेता ने कहा कि देखिए, इज़राइल एक आतंकी मुल्क है. दुनिया के बहुत सारे देश कह रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया गया है. आप किसी हेड ऑफ द स्टेट को कैसे मार सकते हैं? इससे ज्यादा आतंकी बात और क्या हो सकती है? अमेरिका और इज़राइल मिलकर इस तरीके का काम पूरी दुनिया के अंदर कर रहे हैं. वेनेजुएला के अंदर हेड ऑफ द स्टेट को गिरफ्तार करके ले गए, इराक तबाह कर दिया, लीबिया तबाह कर दिया, अब मैक्सिको पर आपकी नजर है, क्यूबा पर आपकी नजर है. ईरान को तबाह करना चाहते हैं.
“जितनी निंदा की जाए उतनी कम है”
उन्होंने कहा कि अपनी ताकत की बुनियाद पर मनमानी कर रहे हैं. जितनी निंदा की जाए उतनी कम है. ईरान के हेड ऑफ द स्टेट ख़ामनेई साहब के फॉलोअर्स पूरी दुनिया के अंदर हैं, न सिर्फ ये कि उनके फॉलोअर्स मुसलमान हैं, हर मजहब का मानने वाला इस बात पर तकलीफ का इज़हार कर रहा है, जिस तरह उनको शहीद किया गया.



