JNU Clash:दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय(JNU) में रविवार देर रात एबीवीपी और लेफ्ट समर्थकों में मारपीट के बाद हंगामा हो गया. दोनों पक्षों की ओर से पत्थरबाजी की गई. इस दौरान कई छात्रों के घायल होने की भी सूचना है. एबीवीपी ने इस घटना पर लेफ्ट पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह पहले से प्री-प्लान्ड था. बता दें कि छात्र वीसी के इस्तीफे की मांग को लेकर मशाल जुलूस निकाल रहे थी. तभी लेफ्ट और एबीवीपी समर्थकों में झड़प हो गई, देखते ही देखते कुछ मिनटों में यह झड़प मारपीट और पत्थबाजी की घटना में तब्दील हो गई. पत्थरबाजी से कई छात्र घायल हो गए.
“ABVP के कुछ वर्कर्स को पीटा गया”
जेएनयू में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) यूनिट के सेक्रेटरी प्रवीण कुमार पीयूष ने कहा कि कल JNU के कुछ लेफ्टिस्ट ऑर्गनाइज़ेशन ने साबरमती टी पॉइंट से VC के घर तक मार्च निकालने का आह्वान किया था. फिर वे स्कूल एरिया में घुस गए और स्टूडेंट्स को धमकाया और उनके पास हॉकी स्टिक, लोहे की रॉड, पत्थर, चाकू थे. उन्होंने कुछ स्टूडेंट्स पर हमला भी किया. ABVP के कुछ वर्कर्स को भी पीटा गया. जब हमने उनके कैंप में रखे डंडों, रॉड, पत्थरों का वीडियो बनाने की कोशिश की, तो उन्होंने हमारे फोन छीन लिए और कुछ तोड़ भी दिए. उन्होंने हम पर पत्थर भी फेंके और हममें से कुछ ने अपनी जान बचाने के लिए स्कूल की बिल्डिंग में शरण ली. हमारे 6-7 वर्कर्स बुरी तरह घायल हो गए हैं और उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है.
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“करीब 100-150 लोगों ने मॉब लिंचिंग की”
JNU मीडिया कन्वीनर विजय जायसवाल (ABVP) ने कहा कि ये लेफ्ट-विंग के लोग जो 7 दिनों से प्रोटेस्ट कर रहे थे आज उन्होंने ABVP वर्कर्स और स्टूडेंट्स को टारगेट किया. करीब 100-150 लोगों ने मॉब लिंचिंग की. दिल्ली पुलिस और JNU सिक्योरिटी गार्ड भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया. यह प्री-प्लान्ड था. ये नकाबपोश लोग थे. हम मांग करते हैं कि JNU एडमिनिस्ट्रेशन इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ एक्शन ले.
“दिल्ली पुलिस ने कुछ नहीं किया”
JNUSU जॉइंट सेक्रेटरी वैभव मीणा (ABVP) ने कहा कि लेफ्ट विंग की हड़ताल पिछले 7-8 दिनों से यहां चल रही है. जिस तरह का आतंक उन्होंने रात भर फैलाया है, वे स्कूलों में गए और 300-400 नकाबपोश लोगों की भीड़ ने स्टूडेंट्स को स्टडी रूम से भगा दिया. विजय को 100-150 लोगों की भीड़ ने मारा है. दिल्ली पुलिस ने कुछ नहीं किया. हम इसकी निंदा करते हैं.



