Vande Mataram New Guidelines: भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी की वंदे मातरम् की नई गाइडलाइन पर उठ रहे सवालों प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत की सांप्रदायिक लिंचिंग की जो सोच है, अपराधिक अराजकता है. उन लोगों को मैं कहना चाहूंगा कि आपका ईमान राष्ट्रगीत गाने या सुनने से, उस पर खड़े होने से अगर हिचकोले खाने लगता है तो आपसे बड़ा कोई बेईमान नहीं है. आपका ईमान अगर इतनी कमजोर डोर से बंधा हो जो राष्ट्रगीत से खत्म हो जाएगा या खतरे में आएगा तो आपको अपने ईमान के बारे में सोचना पड़ेगा. वंदे मातरम् भारत की राष्ट्रवादी आत्मा है.
भाजपा नेता ने आगे कहा कि देश की आजादी के नायकों ने वंदे मातरम् के जुनून और जज्बे के साथ देश को आजाद कराया था. उसी समय जो मुस्लिम लीग थी वो वंदे मातरम का विरोध कर रही थी. मुस्लिम लीग ने वंदे मातरम का विरोध करके विभाजन की विभिषिका बनाई. जिसके बाद देश के टुकड़े हो गए. इन लीगी मानसिकता वाले लोगों को कभी भी सफलता नहीं मिलेगी. चाहे वो जितनी भी वंदे मातरम और अन्य मुद्दों को लेकर देश में कंफ्यूजन क्रिएट करने की कोशिश कर लें.
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मुस्लिम संगठनों को वंदे मातरम् की नई गाइडलाइन पर आपत्ति क्यों?
वंदे मातरम् की नई गाइडलाइन पर मौलानाओं ने आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि देवबंदी उलेमाओं ने सरकार के इस फैसले का खुलकर विरोध किया है. उनका कहना है कि वंदे मातरम में कुछ ऐसे अल्फाज हैं, जिसका उच्चारण करना इस्लाम में जायज नहीं है. इन शब्दों में किसी देवी-देवता की पूजा होती है लेकिन इस्लाम में अल्लाह के अलावा किसी और की पूजा करना हराम माना जाता है.
मौलानाओं का कहना है कि अगर कोई अपनी मर्जी से वंदे मातरम गाना चाहता है तो बखूबी गाए लेकिन जबरन किसी धर्म विशेष पर इसे थोपना लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है. इसे अनिवार्य करने के फैसले पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए.



