Mohan Bhagwat: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा कि मैं उन्हें (सावरकर) को देशद्रोही नहीं कहूंगा लेकिन उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत को मदद की. पहले उन्होंने बड़ा त्याग दिया, इसलिए उन्हें जेल में डाला गया. बाद में उन्होंने माफी मांगी. माफीनामे के लिए आप पुरस्कार कैसे दे सकते हैं? उन्होंने इंसानियत के खिलाफ बातें की हैं. आप बार-बार वीर सावरकर, वीर सावरकर क्यों बोलते हैं? वो तो डरपोक थे. उन्होंने माफी मांगी. उन्हें वीर क्यों बोलना है? जो हिंदुत्ववादी हैं, जिनको इस तरह की गंदी राजनीति करनी है, वो उनको वीर सावरकर वीर सावरकर बोलते हैं.
“सलमान तो डर के मारे वहां गए थे”
वहीं कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई (Hussain Dalwai) ने आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर मुंबई में आयोजित शताब्दी समारोह में कई बॉलीवुड अभिनेताओं के शामिल होने पर कहा कि बहुत सारे लोग गए थे. ये डरे हुए लोग हैं. सत्ता आरएसएस की है, इसलिए उन्हें खुश करने के लिए सलमान खान गए. वैसे एक जमाने में राही मासूम रज़ा भी एक जमाने में गए थे लेकिन वहां जाकर उन्होंने 4 बातें सुनाई थीं. क्या सलमान खान सुना सकते हैं? सलमान तो डर के मारे वहां गए थे. कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि कुछ लोग जाते हैं। जैसे मैंने राही मासूम रज़ा का ज़िक्र किया. आएसएस की लाइन लेने वाले मुसलमान भी हो सकते हैं. हमारे मित्र अब्बास नकवी साहब भी हैं न, गए हैं उनके साथ. उन्हें(सलमान खान) को ऐसा लगता है कि कोई उन्हें मारेगा. यह गैंग, वह गैंग. फिल्म इंडस्ट्री में रहने के बाद दुश्मन भी बहुत होते हैं और दोस्त भी बहुत होते हैं. इनकम टैक्स जैसी चीज़ें भी होती हैं. ईडी का भी भय होता है. इसलिए वह यह दिखाने के लिए गए थे कि हम आपके साथ हैं.
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“मुसलमानों की तादाद जैसे बढ़ती थी अब कम हो रही है”
वहीं मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) के 19 से 25 साल की उम्र के बीच शादी और फिर दंपति को तीन बच्चे होने चाहिए वाले बयान पर कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई (Hussain Dalwai) ने कहा कि उन्हें ऐसा डर लगता है कि मुसलमानों की तादाद बढ़ रही है और हिंदुओं की कम हो रही है. यह सही बात नहीं है. मुसलमानों की तादाद जैसे बढ़ती थी, अब कम हो रही है.
“जावेद अख्तर साहब भी एक बार गए थे”
इसके अलावा मुंबई यूनिवर्सिटी के एक इवेंट से आखिरी वक्त पर नसीरुद्दीन शाह को हटाए जाने पर हुसैन दलवाई (Hussain Dalwai) ने कहा कि जश्न ए उर्दू का कार्यक्रम वहां हमेशा होता है. उसके लिए जावेद अख्तर साहब भी एक बार गए थे. इन्हें बुलाया गया और रात को कॉल करके कहा गया कि आप मत आना. विद्यार्थियों का विरोध है. उन्होंने संपादकीय में लिखा कि मुझे बुलाया गया था लेकिन आखिरी समय मना किया गया. इसका मुझे दुख हुआ है.



