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India-America Trade Deal; अमेरिका का टैरिफ आज से 18 प्रतिशत, भारतीय निर्यातकों को मिलेगा फायदा

India America Trade Deal

Trade Deal : अमेरिका के साथ भारत की ट्रेड डील की शर्तो के मुताबिक आज से अमेरिका भारतीय सामान पर टैक्स 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है हालांकि ट्रेड डील के समझौते पर साईन तो मार्च में होगें. भारत और अमेरिका ने शुक्रवार को अंतरिम व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क जारी किया है। रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स भी हटा लिया गया है।

दोनों देशों ने कहा कि इस फ्रेमवर्क को जल्द लागू किया जाएगा और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में बातचीत आगे बढ़ेगी। भारत-अमेरिका के संयुक्त बयान के मुताबिक, यह फ्रेमवर्क 13 फरवरी 2025 को शुरू हुई- भारत-अमेरिका बीटीं वार्ता को आगे बढ़ाएगा।

इस समझौते में आगे चलकर बाजार पहुंच, सप्लाई चेन को मजबूत करने और ट्रेड बैरियर कम करने जैसे प्रावधान शामिल होंगे। इसके तहत भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं पर सभी टैरिफ खत्म या कम करेगा। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 27.18 लाख करोड़ रुपये) के बाजार को खोलेगा।

उनके मुताबिक, एमएसएसई, किसान और मछुआरे सबसे बड़े लाभार्थी होंगे और इससे महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। इसके अलावा भारत ने अगले पांच साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर (45 लाख 30 हजार करोड़ रुपये) के उत्पाद खरीदने पर सहमति जताई है।

नॉन-टैरिफ बाधाओं को दूर करेंगे दोनों देश

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि दोनों देशों ने फैसला किया है कि वे इसके कुछ नियम तय करेंगे, ताकि इस समझौते का लाभ मुख्य रूप से अमेरिका और भारत को ही मिले, न कि किसी तीसरे देश को।

भारत और अमेरिका का इस व्यापार समझौते में नॉन-टैरिफ बैरियर्स को दूर करने पर खास फोकस है। ये बाधाएं टैरिफ नहीं होतीं, लेकिन व्यापार को मुश्किल बनाती हैं। अमेरिकी मेडिकल डिवाइसेस कंपनियों को भारत में कीमत तय करने के नियम, रजिस्ट्रेशन में देरी जैसी रुकावटों का सामना करना पड़ा रहा था।

भारत ने वादा किया है कि इन लंबे समय से चली आ रही बाधाओं को दूर करेगा, ताकि अमेरिकी मेडिकल डिवाइस आसानी से भारत में बिक सकें। इससे भारतीय अस्पतालों और मरीजों को बेहतर और सस्ती अमेरिकी तकनीक मिल सकती है।

अमेरिकी आईसीटी उत्पाद के आयात के लिए भारत में लाइसेंस की प्रक्रिया बहुत जटिल और समय लेने वाली थी। भारत ने सहमति जताई है कि इन लाइसेंस प्रक्रियाओं को आसान और तेज करेगा। इससे अमेरिकी आईटी और टेक कंपनियों के लिए भारत में बाजार पहुंच आसान हो जाएगी और भारत में भी सस्ते और अच्छे उपकरण उपलब्ध होंगे।

अमेरिकी स्टैंडर्ड्स और टेस्टिंग को मान्यता 

भारत यह भी तय करेगा कि समझौते लागू होने के 6 महीने के अंदर कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में अमेरिकी स्टैंडर्ड्स (जो अमेरिका में इस्तेमाल होते हैं) और टेस्टिंग आवश्यकताओं को स्वीकार किया जा सकता है या नहीं। जब कोई अमेरिकी कंपनी भारत में अपना सामान बेचना चाहती है, तो भारत में अलग-अलग स्टैंडर्ड्स (मानक) और टेस्टिंग (जांच) की जरूरत पड़ती है।

अमेरिका में पहले से ही अपने उत्पादों पर अमेरिकी स्टैंडर्ड्स के अनुसार टेस्टिंग हो चुकी होती है, लेकिन भारत में अक्सर दूसरी बार टेस्टिंग करनी पड़ती है। यानी वही सामान भारत में फिर से जांचा जाता है।

इससे समय लगता है, खर्च बढ़ता है, सामान महंगा हो जाता है, और व्यापार धीमा हो जाता है। भारत ने वादा किया है कि समझौता लागू होने के 6 महीने के अंदर कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में जांच करेगा।

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इसमें देखा जाएगा कि क्या अमेरिकी स्टैंडर्ड्स को सीधे स्वीकार किया जा सकता है। अगर अमेरिका में सामान पहले ही उन स्टैंडर्ड्स के अनुसार टेस्ट हो चुका है, तो भारत में दोबारा टेस्टिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी।

संयुक्त बयान में लिखा है कि इसका नतीजा सकारात्मक रखने की कोशिश की जाएगी। यानी जितना संभव हो अमेरिकी स्टैंडर्ड्स को मान्यता देने की दिशा में काम होगा।

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