Congress Protest: केन्द्र की नीतियों के विरोध में प्रदेश कांग्रेस और अन्य संगठन ने मिलकर सोमवार को विभिन्न जिलों में विरोध प्रदर्शन किया। राज्यभर में मनरेगा बचाओ, नरेगा कानून वापस लाओ और वीबी राम जी बिल को रद्द करने की मांग को लेकर कांग्रेस और अलग-अलग संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं। राजधानी में शहीद स्मारक पर धरने में वीबी राम जी बिल को रद्द करने की मांग को लेकर प्रदेशभर से मजदूर, कामगार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। इस दौरान गीत गाकर और नाचकर विरोध जताया गया।
जयपुर में सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय, निखिल डे, जयपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा, गोपाल शर्मा, पुष्पेंद्र भारद्वाज, अर्चना शर्मा, चाकसू से पूर्व विधायक वेदप्रकाश सोलंकी सहित कई कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कांग्रेस शहर अध्यक्ष सुनील शर्मा हुए शामिल
इस दौरान जयपुर शहर कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुनील शर्मा 1 घंटे धरने में बैठने के बाद रवाना हो गए। उनके साथ अन्य नेता धरने से निकले। अब विधायक रफीक खान, विधायक प्रशांत शर्मा, विधायक मनीष यादव पोर्ट चाकसू से पूर्व विधायक प्रकाश सोलंकी पहुंचे
धरने के दौरान आयोजित मजदूर महापंचायत में निर्णय लिया गया कि विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन को रद्द कर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए। यहां लोगों ने मंच से कहा कि दिसंबर 2025 में केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा को समाप्त कर नया कानून लागू करना करोड़ों ग्रामीण मजदूरों के साथ ऐतिहासिक विश्वासघात है। क्योंकि मनरेगा मजदूरों के लंबे संघर्ष से प्राप्त एक कानूनी अधिकार था।
‘लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करता है नया बिल’
सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने कहा वीबी राम जी संविधान की आत्मा के खिलाफ है। मनरेगा ने पहली बार गांव के गरीब को राज्य से काम मांगने का अधिकार दिया था, लेकिन नया कानून उस अधिकार को छीनकर रोजगार को केंद्र सरकार की मर्जी पर निर्भर बना देता है। यह लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर कर केंद्रीकृत नियंत्रण को बढ़ावा देता है।
निखिल डे ने कहा- यह कानून रोजगार की गारंटी नहीं, बल्कि मजदूरों की असुरक्षा की गारंटी है। काम, मजदूरी और योजना३.तीनों को ग्राम सभा और राज्यों से छीनकर केंद्र सरकार के नियंत्रण में सौंप दिया गया है। अब काम मांगना मजदूर का कानूनी अधिकार नहीं रहा, बल्कि रोजगार कब, कितना और किसे मिलेगा, यह केंद्र द्वारा तय किया जाएगा।
दिल्ली जाकर प्रदर्शन करेंगे
अलवर में मिनी सचिवालय के बाहर कांग्रेस पार्टी ने विरोध प्रदर्शन किया। यहां अलवर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष प्रकाश गंगावत ने कहा- मनरेगा का नाम बदलने पर सरकार को जगाने में लगे हैं। हम दुबारा गांव-गांव जाएंगे। दिल्ली में जाकर प्रदर्शन करेंगे। अभी सांकेतिक धरना देकर ज्ञापन दिया है। दूसरी तरफ केंद्र सरकार के बजट में कुछ नहीं दिया गया। राजस्थान व अलवर के लिए भी कोई घोषणा नहीं की गई। केंद्र से आने वाले बजट में भी कटौती कर दी। केंद्र सरकार को नरेगा में 90 प्रतिशत बजट देना चाहिए।
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उदयपुर में धरना दिया
उदयपुर में मनरेगा बचाओ को लेकर कांग्रेस कमेटी ने संभागीय आयुक्त कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण धरना दिया। इस दौरान देहात अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा ने कहा- भाजपा सरकार की नीयत ठीक नहीं है। इसी वजह से मनरेगा को समाप्त किया है। दुनिया महात्मा गांधी को आदर्श मानती है। यहां हमारे प्रधानमंत्री उनके नाम की योजना को खत्म कर नए नाम से शुरू कर रहे हैं। रामजी के नाम से योजना चलाकर राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं।
कोटा में यूजीसी के खिलाफ प्रदर्शन
कोटा में यूजीसी के नए प्रावधान के विरोध में सवर्ण समाज के लोगों ने सीएडी सर्किल से संभागीय आयुक्त कार्यालय तक रैली निकाली। इस दौरान टायर जलाकर प्रदर्शन किया। 13 जनवरी को जारी की गई अधिसूचना को वापस लेने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया।
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