Shankaracharya Avimukteshwaranand: ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मौनी अमावस्या के दिन संगम तट पर स्नान से वंचित रहने का मामला भी गरमाया हुआ है. सोमवार सुबह स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मौन व्रत धारण करने की भी खबर आई थी. वहीं दोपहर बाद शंकराचार्य ने मीडिया से बातचीत के दौरान बिना किसी का नाम लिए बीजेपी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि “ये ढोंगी हिंदू हैं, छद्म में हिंदू हैं, असली हिंदू नहीं हैं. ये लोग सत्ता पर बैठ गए हैं. इसलिए इनको लगता है कि ये सच्चे हिंदू रहेंगे तो भंडाफोड़ होगा.
“आपने कैसे सच्चे और ढोंगी की परिभाषा तय कर दी”
शंकराचार्य ने आगे कहा कि अच्छा आप कहेंगे कि आपने कैसे सच्चे और ढोंगी की परिभाषा तय कर दी. तो हमारा ये कहना है कि हमारे यहां ये शर्त है कि जो हिंदू होता है वो गौभक्त होता है. जो गौ भक्त होता है वो गौ हत्या नहीं चाहता है. तो जो गौ हत्या नहीं चाहता है वो असली हिंदू है. अगर ये असली हिंदू हों तो अभी गौहत्या बंद करके दिखवा दें. इनके हाथ में सत्ता है, अभी कानून बना दें कि पूरे भारत में गौ हत्या बंद की जाती है. हम मान लेंगे कि ये असली हिंदू हैं. लेकिन हम सत्ता में भी हों उसके बाद भी गौहत्या होती रहें और हम अपने आपको हिंदू भी कहते रहें. यह दोनों बात कैसे एक साथ हो सकती हैं.
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“एक शंकराचार्य को आप स्नान नहीं करा पाए?”
वहीं माघ मेले में अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में कंप्यूटर बाबा ने कहा कि हमारे भारत के इतिहास में हो क्या रहा है. हिंदू खतरे में, हिंदू खतरे में, सनातन खतरे में, यह सब बोलते हैं. यह समझ से परे है. वास्तव में अब लगा कि यदि इनकी सरकार रही तो सनातन हिंदू खतरे में हैं, जिस ढंग से कल देखा गया. एक शंकराचार्य हमारे धर्माचार्य हैं और हमारे देश में हमारा सनातन है, उसमें चार शंकराचार्य होते हैं और चारों हमारे यहां पूज्य होते हैं। माघ का महीना है, माघ का मेला है तो यह संतों का मेला है, सनातन का मेला है. यह धर्माचार्यों का मेला है, यह शंकराचार्यों का मेला है, महंतों का मेला है कि प्रशासन का मेला है? नेताओं का मेला है? आईए आपका स्वागत है, जनता-जन का स्वागत है, नेताओं का स्वागत है. परंतु प्रशासन का काम है हमें व्यवस्थित कराना। एक शंकराचार्य को आप स्नान नहीं करा पाए?
उन्होंने आगे कहा कि ध्यान रखें योगी जी, जब आप इसकी सिफारिश करें कि मेला बहुत अच्छा हुआ, तो आपको ये भी बताना पड़ेगा कि इस माघ मेले में एक गलती जरूर हुई है, जो कमी रह गई है। शंकराचार्य जी को स्नान कराने में हमारा प्रशासन विफल रहा. ये आपको बताना भी पड़ेगा.



