सर्दियों के मौसम में दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। आमतौर पर लोग हार्ट अटैक को सिर्फ सीने में दर्द से जोड़कर देखते हैं, लेकिन कई बार इसके संकेत शरीर के दूसरे हिस्सों में भी दिखाई देने लगते हैं। पैरों में दर्द, सूजन या सुन्नपन भी दिल की गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकता है।
अगर आपको चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर पैरों में दर्द या ऐंठन महसूस होती है, टखनों या पंजों में सूजन रहती है, तो इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। मेडिकल साइंस में इस स्थिति को पेरिफरल आर्टरी डिजीज (Peripheral Artery Disease – PAD) कहा जाता है।
क्या है पेरिफरल आर्टरी डिजीज?
पेरिफरल आर्टरी डिजीज एक ऐसी समस्या है, जिसमें पैरों तक खून पहुंचाने वाली नसों में चर्बी या कोलेस्ट्रॉल जमा हो जाता है। इससे नसें संकरी हो जाती हैं और ब्लॉकेज की स्थिति बन जाती है। नतीजतन पैरों तक सही मात्रा में रक्त नहीं पहुंच पाता।
यह समस्या सिर्फ पैरों तक सीमित नहीं रहती। धीरे-धीरे यही ब्लॉकेज शरीर की अन्य धमनियों, खासकर दिल और दिमाग तक जाने वाली नसों को भी प्रभावित कर सकती है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
पेरिफरल आर्टरी डिजीज के सामान्य लक्षण
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चलने या सीढ़ी चढ़ने पर पैरों में दर्द या ऐंठन
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पैरों, टखनों या पंजों में सूजन
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पैरों में ठंडापन महसूस होना
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त्वचा का रंग नीला या बैंगनी पड़ना
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पैरों में सुन्नपन या झनझनाहट
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त्वचा का रूखा होना और नाखूनों का मोटा या पीला होना
इन लक्षणों का दिखना इस बात का संकेत हो सकता है कि पैरों की नसों में ब्लॉकेज बन रहा है।
पैरों की नसों का दिल से क्या है कनेक्शन?
कार्डियोलॉजिस्ट के अनुसार, पेरिफरल आर्टरी डिजीज में बनने वाला ब्लड क्लॉट दिल के लिए भी खतरा बन सकता है। ऐसे कई मामलों में देखा गया है कि PAD से पीड़ित मरीजों में हार्ट अटैक की आशंका ज्यादा होती है।
मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, स्मोकिंग और शारीरिक गतिविधि की कमी इस बीमारी के बड़े कारण माने जाते हैं। हालांकि हर मरीज में यह सीधे हार्ट अटैक का कारण बने, ऐसा जरूरी नहीं, लेकिन इसे एक गंभीर रिस्क फैक्टर जरूर माना जाता है।
किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत?
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जिन्हें पहले से दिल की बीमारी हो
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हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज के मरीज
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मोटापे से ग्रस्त लोग
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लंबे समय तक बैठे रहने या कम चलने-फिरने वाले लोग
अगर इन लोगों में पैरों से जुड़ी कोई भी परेशानी दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
पेरिफरल आर्टरी डिजीज से कैसे करें बचाव?
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रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज या वॉक करें
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संतुलित और हेल्दी डाइट अपनाएं
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ज्यादा फैट, मैदा और रेड मीट से दूरी बनाएं
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धूम्रपान और शराब से बचें
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तनाव को कम करने की कोशिश करें
निष्कर्ष
पैरों में होने वाली सूजन, दर्द या सुन्नपन को सिर्फ थकान समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। यह दिल की सेहत से जुड़ा एक अहम संकेत हो सकता है। समय रहते जांच और सही लाइफस्टाइल अपनाकर पेरिफरल आर्टरी डिजीज और हार्ट अटैक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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