HighCourt: राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर की डिवीजन बेंच ने 12 साल की नाबालिग बेटी से रेप के दोषी पिता की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने निचली अदालत की ओर से दी गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा ने कहा कि बाप-बेटी जैसे रिश्ते को कलंकित करने वाले अपराध में कोई ढील नहीं दी जा सकती।
पीड़िता की गवाही भरोसेमंद, बचाव पक्ष की दलीलें खारिज
कोर्ट ने कहा कि पीड़िता का बयान पूरी तरह सही और भरोसे के लायक है। सिर्फ डीएनए रिपोर्ट नेगेटिव आने या एफआईआर देर से दर्ज होने से आरोपी को राहत नहीं मिल सकती। मेडिकल रिपोर्ट भी पीड़िता के बयान का समर्थन करती है। कोर्ट ने साफ कहा कि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए सहमति का कोई सवाल ही नहीं उठता और झूठे केस का कोई ठोस सबूत नहीं है।
पीड़िता को 7 लाख का मुआवजा
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि पीड़िता को विक्टिम मुआवजा योजना के तहत 7 लाख रुपये दिए जाएं। कोर्ट ने कहा कि जब पिता ही बच्ची के साथ अपराध करे, तो यह सिर्फ जुर्म नहीं बल्कि भरोसे का बड़ा उल्लंघन है। इसी के साथ हाईकोर्ट ने पॉक्सो कोर्ट के फैसले को सही मानते हुए आरोपी की अपील पूरी तरह खारिज कर दी।



