प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में द ग्रीन बिलियंस लिमिटेड (TGBL) के CEO प्रतीक कनकिया को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई मुंबई जोनल कार्यालय की ओर से की गई है। जांच में सामने आया है कि प्रतीक कनकिया पर करीब ₹47.32 करोड़ की अवैध धनशोधन गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को मुंबई की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें 9 जनवरी तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है।
सरकारी कंपनी से फर्जीवाड़े से लिया गया लोन
ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि प्रतीक कनकिया ने भारत सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (BECIL) से लगभग ₹50 करोड़ का लोन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हासिल किया। यह राशि एक एनर्जी प्रोजेक्ट के नाम पर ली गई थी, लेकिन शर्तों के अनुसार इसका इस्तेमाल नहीं किया गया।
वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट बना घोटाले की जड़
मामले की जड़ वर्ष 2018 से जुड़ी है, जब पुणे नगर निगम ने वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के लिए टेंडर जारी किया था। बाद में इस प्रोजेक्ट के लिए एक विशेष कंपनी बनाई गई, जिसे आगे चलकर TGBL द्वारा अधिग्रहित किया गया। इसके बाद BECIL के साथ मिलकर एक कंसोर्टियम बनाया गया और इसी आधार पर बड़ा लोन लिया गया।
साइट पर नहीं हुआ कोई काम
ईडी के अनुसार, जिस प्रोजेक्ट के लिए लोन लिया गया था, उस साइट पर आज तक कोई ठोस काम शुरू नहीं हुआ। इसकी पुष्टि संबंधित नगर निगम अधिकारियों ने भी की है। जांच में यह भी सामने आया है कि लोन की शर्तों का पालन नहीं किया गया और जरूरी अनुमतियां व दस्तावेज जाली थे।
निजी ऐशो-आराम पर खर्च हुआ पैसा
जांच एजेंसी का कहना है कि प्रोजेक्ट के नाम पर मिली रकम का इस्तेमाल निजी ऐशो-आराम पर किया गया। इसमें महंगी गाड़ियां, मुंबई और दिल्ली के पॉश इलाकों में किराए के लग्जरी घर, और उनके रिनोवेशन जैसे खर्च शामिल हैं।
जांच जारी, और खुलासों की संभावना
ईडी का कहना है कि इस मामले में कुछ अन्य लोगों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
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