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अगर आपका बच्चा भी करता है खिलौनों से बात, तो जानें चाइल्ड साइकोलॉजी से जुड़ी ये बड़ी बात

Child psychology: क्यों आपका बच्चा भी करता है खिलौनों से बात ?

Child psychology: कई माता-पिता अपने छोटे बच्चों को गुड़िया, टेडी बेयर या खिलौने वाली  कारों से बातें करते देखकर मुस्कुराते हैं, लेकिन कभी-कभी मन में ये सवाल भी उठता है कि आखिर बच्चा ऐसा क्यों करता है? क्या यह सिर्फ खेल है या कुछ और? विशेषज्ञों (Child psychology) के अनुसार, टॉडलर्स (1-3 साल के बच्चे) का खिलौनों से बात करना पूरी तरह सामान्य और स्वस्थ व्यवहार है। यह उनके कल्पनाशील खेल (pretend play) का हिस्सा होता है, जो उनके मानसिक, भावनात्मक, भाषाई और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कल्पना शक्ति का जादू

जब बच्चे खिलौनों से बात करते हैं, तो वे अपनी इमेजिनेशन का पूरा इस्तेमाल कर रहे होते हैं। वे निर्जीव खिलौनों को जीवंत बना देते हैं और उन्हें भावनाएं, आवाज और व्यक्तित्व देते हैं। यह कल्पनात्मक खेल बच्चों को वास्तविक जीवन की स्थितियों को सुरक्षित तरीके से समझने और अभ्यास करने का मौका देता है। जैसे:

  • देखभाल करना (गुड़िया को खिलाना या सुलाना)
  • शेयरिंग सीखना
  • समस्याओं का समाधान निकालना

यह खेल बच्चों की रचनात्मकता को बढ़ावा देता है और उन्हें दुनिया को नए नजरिए से देखना भी सिखाता है।

भाषा और संवाद कौशल का विकास

खिलौनों से बात करते समय बच्चे नए शब्दों, वाक्यों और उच्चारण की प्रैक्टिस करते हैं।और क्योंकि यहां कोई उन्हें टोकता या सुधारता नहीं हैं, इसलिए वे बेखौफ होकर बोलते हैं। इससे उनका 
  • शब्द भंडार बढ़ता है
  • वाक्य संरचना मजबूत होती है
  • सुनी हुई बातों को दोहराने की क्षमता विकसित होती है

विशेषज्ञ (Child psychology) कहते हैं कि यह भाषाई विकास का एक मजेदार और प्राकृतिक तरीका है।

भावनाओं और सामाजिक व्यवहार को समझना

बच्चे खिलौनों के साथ विभिन्न भावनाएं व्यक्त करते हैं – कभी डांटते हैं, कभी सवाल पूछते हैं, तो कभी प्यार से दिलासा देते हैं। इससे वे:

  • दया, गुस्सा, प्यार और सहानुभूति जैसी भावनाओं को समझते और व्यक्त करते हैं
  • सामाजिक नियम सीखते हैं, जैसे  दूसरों की भावनाओं का ध्यान रखना

यह प्रक्रिया उन्हें empathic (सहानुभूतिशील) बनाती है और वास्तविक रिश्तों में भी बेहतर व्यवहार करने में मदद करती है।

दिन की घटनाओं को प्रोसेस करना

अक्सर बच्चे दिनभर की घटनाओं को खेल के माध्यम से दोहराते हैं। अगर वे खिलौनों के साथ चाय पार्टी करते हैं, खाना खिलाते हैं या बाहर घुमाने की बात करते हैं, तो वे किसी वास्तविक अनुभव को समझने और प्रोसेस करने की कोशिश कर रहे होते हैं। यह नई स्थितियों को जोड़ने और विचारों को संगठित करने में सहायक होता है।

चिंता छोड़ें, खुशी मनाएं!

खिलौनों से बात करना बच्चों के विकास की एक सकारात्मक और सामान्य स्टेज है। यह दिखाता है कि आपका बच्चा जिज्ञासु, रचनात्मक और सीखने के लिए उत्सुक है। उम्र बढ़ने के साथ यह व्यवहार बदलता रहता है, लेकिन इसके फायदे लंबे समय तक रहते हैं। माता-पिता को इसे अपने बच्चे के सक्रिय दिमाग और स्वस्थ विकास का संकेत मानना चाहिए। अगर बच्चा खुश और अन्य गतिविधियों में भी सक्रिय है, तो कोई चिंता की बात नहीं!

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