रायपुर एयरपोर्ट पर ड्यूटी के दौरान एक पुलिस अधिकारी द्वारा कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के चरण स्पर्श करने के मामले ने देशभर में चर्चा छेड़ दी है। घटना के बाद संबंधित पुलिसकर्मी को लाइन अटैच किए जाने पर अब बाबा बागेश्वर ने इस पूरे प्रकरण पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने साफ कहा कि इस घटना को “आस्था बनाम अनुशासन” के रूप में दिखाना सही नहीं है। उन्होंने इसे अनावश्यक रूप से बढ़ाया गया विवाद बताया और कहा कि वर्दी पहनने के बावजूद एक पुलिसकर्मी इंसान ही होता है, जिसकी अपनी धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत भावनाएं हो सकती हैं।
क्या है पूरा मामला
रायपुर एयरपोर्ट पर सुरक्षा ड्यूटी में तैनात माना थाने के थाना प्रभारी ने कथावाचक को देखकर अपनी टोपी और जूते उतारे और श्रद्धा भाव से उनके पैर छुए। बाबा ने भी हाथ उठाकर उन्हें आशीर्वाद दिया। इस दौरान का वीडियो किसी ने रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने संबंधित अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें लाइन अटैच कर दिया। इसी फैसले को लेकर बहस शुरू हो गई।
“वर्दी के भीतर भी इंसान होता है”
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि पुलिसकर्मी को केवल एक मशीन या सिस्टम के रूप में देखना गलत है। उन्होंने सवाल किया कि क्या वर्दी पहनने के बाद कोई व्यक्ति अपनी संस्कृति, संस्कार और आस्था छोड़ देता है।
बाबा ने कहा कि श्रद्धा व्यक्त करना किसी भी तरह से अनुशासनहीनता नहीं है और इसे जरूरत से ज्यादा तूल दिया गया।
पुलिस की भूमिका को बताया अहम
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने पुलिस के काम की सराहना करते हुए कहा कि जब आम लोग त्योहार और पारिवारिक समय बिताते हैं, तब पुलिसकर्मी सड़कों पर ड्यूटी निभा रहे होते हैं। कानून-व्यवस्था, धार्मिक आयोजन और आपात स्थितियों में पुलिस की भूमिका सबसे अहम होती है।
उन्होंने कहा कि समाज की सुरक्षा करने वालों के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान जरूरी है। किसी पुलिसकर्मी का अपनी आस्था के अनुसार श्रद्धा जताना उसकी संस्कृति और मूल्यों को दर्शाता है, न कि अनुशासनहीनता को।
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