हरियाणा में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर चल रही बहस अब और तेज हो गई है। इस मुद्दे पर अब खाप पंचायतों ने भी खुलकर मोर्चा संभाल लिया है। खाप प्रतिनिधियों ने साफ शब्दों में कहा है कि लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर आधे-अधूरे कानून या सुधार स्वीकार नहीं किए जाएंगे, बल्कि इसे पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए।
खाप पंचायतों ने हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में उठी उस मांग को भी खारिज कर दिया है, जिसमें उत्तराखंड सरकार की तर्ज पर लिव-इन रिलेशनशिप के लिए रजिस्ट्रेशन जैसे प्रावधान लागू करने की बात कही गई थी। खापों का कहना है कि यह समाधान नहीं है और इससे सामाजिक समस्याएं और बढ़ेंगी।
बीजेपी विधायक की मांग से बढ़ा विवाद
हरियाणा में यह मामला उस वक्त और गरमा गया, जब बीजेपी विधायक लक्ष्मण यादव ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान लिव-इन रिलेशनशिप पर सख्त कानून लाने की मांग रखी। विधायक ने कहा कि समाज में लिव-इन के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे पारिवारिक और सामाजिक ढांचा कमजोर हो रहा है।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि उत्तराखंड की तरह हरियाणा में भी लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य किया जाए, ताकि सरकार के पास ऐसे संबंधों से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध हो सके।
खापों का सख्त रुख, बोले – रजिस्ट्रेशन नहीं, पूर्ण प्रतिबंध चाहिए
खाप पंचायतों ने विधायक की इस मांग पर नाराजगी जताते हुए कहा कि रजिस्ट्रेशन कोई समाधान नहीं है। खाप नेताओं का कहना है कि लिव-इन रिलेशनशिप भारतीय सामाजिक मूल्यों और पारिवारिक व्यवस्था के खिलाफ है। ऐसे संबंधों से समाज में अस्थिरता, रिश्तों में अविश्वास और नैतिक गिरावट बढ़ रही है।
खापों ने हरियाणा सरकार को चेतावनी दी है कि यदि लिव-इन रिलेशनशिप को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में कदम नहीं उठाए गए, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन कर सकते हैं।
उत्तराखंड मॉडल पर क्यों उठ रहे सवाल?
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) के तहत लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण का प्रावधान किया गया है। वहां सामने आए आंकड़ों के अनुसार, कई मामलों में यह भी सामने आया कि लिव-इन में रह रहे कुछ लोग पहले से शादीशुदा थे। इसी आधार पर खाप पंचायतें और सामाजिक संगठन इस मॉडल को हरियाणा में लागू करने के खिलाफ हैं।
महिला सुरक्षा को लेकर विधायक की दलील
बीजेपी विधायक लक्ष्मण यादव का कहना है कि लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण होने से महिला सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। उनके अनुसार, कई मामलों में पुरुष द्वारा संबंध तोड़ने के बाद महिलाएं मानसिक तनाव में आकर आत्मघाती कदम उठा लेती हैं। रजिस्ट्रेशन से ऐसे मामलों पर अंकुश लगाया जा सकता है।
उन्होंने दावा किया कि उनके जिले रेवाड़ी में लिव-इन से जुड़े आत्महत्या के कई मामले सामने आ चुके हैं, जो चिंता का विषय है।
आगे क्या करेगी सरकार?
फिलहाल हरियाणा में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी बहस तेज हो चुकी है। एक ओर विधायक और कुछ वर्ग इसे कानून के दायरे में लाने की बात कर रहे हैं, तो वहीं खाप पंचायतें इसे पूरी तरह समाप्त करने की मांग पर अड़ी हैं। अब देखना होगा कि हरियाणा सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।



