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मुसलमानों को लेकर पूछा ऐसा सवाल, मच गया बवाल, प्रोफेसर सस्पेंड

दिल्ली। भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचारों पर उचित उदाहरणों के साथ चर्चा करें। यह सवाल जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में एक सेमेस्टर एग्जाम के दौरान पूछ लिया गया कि सोशल मीडिया से लेकर हर तरफ हंगामा मच गया। सवाल पूछने वाले प्रोफेसर को सस्पेंड कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार 21 दिसंबर 2025 को बीए (ऑनर्स) सोशल वर्क के पहले सेमेस्टर का पेपर सोशल प्रॉब्लम्स इन इंडिया हुआ। इस पेपर में 15 नंबर का एक सवाल था-भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचारों पर उचित उदाहरणों के साथ चर्चा करें। पेपर की फोटो वायरल होते ही बवाल शुरू हो गया। लोग इसे पक्षपातपूर्ण और भड़काऊ बता रहे हैं। यूनिवर्सिटी ने तुरंत एक्शन लिया और इस सवाल को तैयार करने वाले प्रोफेसर को सस्पेंड कर दिया, साथ ही जांच कमेटी बना दी। अब सवाल यह है कि आखिर इस पेपर में यह सवाल पूछने वाले प्रोफेसर कौन हैं?

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इस विवादित पेपर को तैयार करने वाले प्रोफेसर हैं वीरेंद्र बालाजी शहारे। वह जामिया के सोशल वर्क डिपार्टमेंट में प्रोफेसर हैं। यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर उनकी प्रोफाइल के मुताबिक उनके पास 22 साल से ज्यादा का टीचिंग और रिसर्च एक्सपीरियंस है। उनकी रुचि के क्षेत्र हैं ग्रामीण और शहरी कम्युनिटी डेवलपमेंट, दलित और जनजातीय स्टडीज, सामाजिक बहिष्करण और समावेशन (सोशल एक्सक्लूजन एंड इंक्लूजन), डाइवर्सिटी, एजुकेशन और सोशल डेवलपमेंट, रिसर्च एंड पॉलिसी एनालिसिस. उन्होंने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स से पीएचडी और एमफिल किया है। वीरेंद्र बालाजी शहारे ने टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई से बीए (सोशल वर्क) किया। वह पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी, नागपुर यूनिवर्सिटी और जामिया में ही पढ़ा चुके हैं। एडमिनिस्ट्रेटिव रोल्स भी निभाए जैसे 2019-2022 में डिपार्टमेंटल रिसर्च कमेटी (क्त्ब्) के कन्वीनर और 2019-2020 में पीएचडी कोऑर्डिनेटर बने.उनके मार्गदर्शन में 7 पीएचडी स्टूडेंट्स हैं.दो किताबें पब्लिश हो चुकी हैं. उनके रिसर्च पेपर्स में सोशल एक्सक्लूजन, हाशिए पर रहने वाले कम्युनिटीज पर हिंसा, मैनुअल स्कैवेंजिंग, प्रवासी मजदूर, दलित महिलाएं और ह्यूमन राइट्स जैसे टॉपिक्स शामिल हैं.

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यूनिवर्सिटी ने क्या एक्शन लिया और आगे क्या ?
पेपर वायरल होने और शिकायतें आने के बाद जामिया प्रशासन ने 23 दिसंबर 2025 को प्रोफेसर शहारे को तुरंत सस्पेंड कर दिया.ऑफिशिएटिंग रजिस्ट्रार शेख सफीउल्लाह की तरफ से जारी ऑर्डर में इसे उनकी नेग्लिजेंस और केयरलेसनेस बताया गया है. सस्पेंशन के दौरान उनका हेडक्वार्टर नई दिल्ली रहेगा और बिना परमिशन के शहर नहीं छोड़ सकते. यूनिवर्सिटी ने जांच कमेटी गठित कर दी है जो पूरे मामले की जांच करेगी. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि नियम के मुताबिक पुलिस में थ्प्त् भी दर्ज की जाएगी, हालांकि एक रिपोर्ट में डिप्टी रजिस्ट्रार की ओर से कहा गया है कि फिलहाल थ्प्त् का कोई प्लान नहीं है. जांच जारी है.यह पूरा मामला जामिया के सोशल वर्क डिपार्टमेंट से जुड़ा है, जो न्ळब् का सेंटर ऑफ एडवांस्ड स्टडी भी है. कुछ स्टूडेंट ग्रुप्स जैसे फ्रेटरनिटी मूवमेंट ने सस्पेंशन का विरोध किया है.इसे एकेडमिक फ्रीडम पर हमला बताया, लेकिन ज्यादातर लोग सवाल को पक्षपातपूर्ण बता रहे हैं. कुल मिलाकर एग्‍जाम में पूछे गए एक सवाल ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है.

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