Premanand Maharaj:वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज की पदयात्रा का इंतजार लाखों भक्त बेसब्री से करते हैं। पहले यह पदयात्रा रात करीब 2 बजे होती थी, लेकिन अब इसमें बड़ा बदलाव किया गया है. सर्दियों में ठंड और भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पदयात्रा का नया समय शाम 5 बजे कर दिया गया है.
पदयात्रा का नया समय और रूट
- पुराना समय: रात 2 बजे (या 2:30 बजे)
- नया समय: शाम 5 बजे
- शुरुआत: श्री कृष्ण शरणम् फ्लैट (छटीकरा रोड, वृंदावन) से
- समाप्ति: श्री राधा केलि कुंज आश्रम (रमन रेती) तक
- दूरी: करीब 2 किलोमीटर
इस बदलाव से भक्तों को रात भर ठंड में इंतजार नहीं करना पड़ेगा. अब शाम के समय ही महाराज जी की झलक और आशीर्वाद लेने का मौका मिलेगा. हजारों श्रद्धालु मार्ग पर एकत्र होकर भजन-कीर्तन करते हैं और महाराज की एक झलक पाने के लिए कतारें लगाते हैं.
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कौन हैं प्रेमानंद जी महाराज?
प्रेमानंद जी महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनका बचपन का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था. परिवार में भक्ति का माहौल होने से उनका झुकाव भी राधा-कृष्ण भक्ति की ओर हो गया। मात्र 13 वर्ष की आयु में उन्होंने घर त्यागकर संन्यास ले लिया और वाराणसी पहुंच गए.
वहां उन्होंने अपने गुरु पुज्य श्री हित गौरांगी शरण जी महाराज (बड़े गुरुजी) की सेवा की। गुरु कृपा और वृंदावन धाम के आशीर्वाद से वे राधा रानी के सहचरी भाव में लीन हो गए। आज वे राध



