Recharge : टेलीकॉम कंपनियों के दावे और हकीकत में अंतर होता है। टेलीकॉम कंपनियों के ऐड में अनलिमटेड 5जी शब्द जितना आकर्षक दिखता है उसके पीछे शर्तें भी होती हैं. अक्सर यूजर्स रिचार्ज करने के बाद खुद को तब ठगा हुआ महसूस करते हैं जब अचानक उनकी सुपरफास्ट स्पीड थम जाती है. आखिर क्या है वह सच जिसे टेलीकॉम कंपनियां आपसे छिपाती हैं? और क्यों एक खास लिमिट के बाद आपका 5जी डेटा सिर्फ नाम का अनलिमिटेड रह जाता है? आज के समय में हर कोई सुपर फास्ट इंटरनेट स्पीड की तलाश में रहता है, इसके लिए डेटा भी खूब खर्च होता है. ऐसे में लोग अक्सर उन अनलिमिटेड 5जी डेटा वाले प्लान खोजते हैं जो बिना किसी रुकावट के उन्हें स्ट्रीमिंग और डाउनलोडिंग की पूरी आजादी दे. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस प्लान को आप अनलिमिटेड समझकर रीचार्ज कर रहे हैं क्या वह वाकई में अनलिमटेड या भी या नहीं.
कंपनियों की पॉलिसी समझिए
भले ही आज जो जो 5जी डेटा वाला रीचार्ज कर रहे हों उसमें अनलिमिटेड लिखा हो, लेकिन ज्यादातर कंपनी फेयर यूजेज पॉलिसी यानी एफयूपी लागू करती हैं. इसका मतलब होता है कि एक फिक्स डेटा लिमिट जैसे 300जीबी या उससे ज्यादा पार करने के बाद आपकी इंटरनेट स्पीड स्लो हो जाती है. कंपनियां अक्सर इस लिमिट का खुलासा नहीं करतीं लेकिन भारी इस्तेमाल पर आपकी स्पीड अचानक गिर सकती है.
5जी के लिए जरूरी शर्तें
अगर आप अपने रीचार्ज प्लान में अनलिमिटेड 5जी का मजा लेना चाहते हैं तो आपको इन बातों का ध्यान रखना होगा- आपके पास 5जी स्मार्टफोन होना चाहिए. आपके एरिया में 5जी नेटवर्क हो. आपका रिचार्ज प्लान कम से कम 239 रुपये या उससे अधिक का होना चाहिए. अगर इनमें से आप एक भी शर्त पूरा नहीं करते हैं तो आप पुराने 4जी नियमों पर आ जाएंगे, जहां डेटा की सख्त डेली लिमिट होती है.
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स्लो हो जाती है इंटरनेट स्पीड
4जी और 5जी के बीच का फेरबदल
भारत में ज्यादातर अनलिमिटेड 5जी प्लान असल में 4जी प्लान के साथ मिलने वाले एक्स्ट्रा बेनिफिट हैं. जैसे ही आप 5जी कवरेज एरिया से बाहर निकलते हैं आपकी डेली लिमिट जैसे 1.5जीबी या 2जीबी फिर से लागू हो जाती है. यानी सफर के दौरान आपका इंटरनेट कभी भी खत्म हो सकता है. इस बात में कोई शक नहीं कि अनलिमिटेड 5जी प्लान्स ने यूजर्स को पहले से ज्यादा इंटरनेट इस्तेमाल करने की आजादी देते हैं, लेकिन यह पूरी तरह फ्री-फॉर-ऑल नहीं होते हैं. रिचार्ज करने से पहले नियमों को ध्यान से पढ़ना जरूरी होता है जिससे आप मार्केटिंग के दावों और हकीकत के बीच का अंतर समझ सकें.
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