Pahalgam Attack Anniversary: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को आज एक साल पूरा हो गया है. 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम की बैसरन घाटी में दोपहर 2 बजे के करीब तीन आतंकी जंगल की ओर से आए और गोलियां बरसाने लगे. शुरुआत में किसी को समझ नहीं आया कि क्या हुआ है. जब लाशें गिरने लगीं, तब लगा कि हमला हुआ है. लोग बचने के लिए भागे, लेकिन उस मैदान में छिपने की जगह ही नहीं थी. 26 निर्दोष लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई. जिसमें कानपुर के शुभम द्विवेदी भी शामिल थे. पहलगाम की बरसी पर शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या द्विवेदी का दर्द छलका है. उन्होंने एक निजी न्यूज एजेंसी से बातचीत के दौरान कहा कि पहलगाम आतंकी हमला हम 26 परिवारों के लिए बहुत बड़ी घटना और दुखद घटना है लेकिन मुझे लगता है कि ये भू-राजनीति स्तर पर भी ये बहुत बड़ी घटना थी. आज जब मैं सुबह-सुबह न्यूज़ देख रही थी तो कई देशों ने इस पहलगाम आतंकी हमले के एक वर्ष पूरे होने पर अपना दुख जताया है. पीएम मोदी ने पहलगाम आतंकी हमले के एक वर्ष पूरे होने पर सुबह ट्वीट किया कि उन्हें 26 परिवारों के लिए दुख है.
“पूरे देश और दुनिया पर प्रभाव डाला है”
ऐशान्या द्विवेदी ने आगे कहा कि पहलगाम आतंकी हमला हम 26 परिवारों के लिए बहुत बड़ी घटना और दुखद घटना है लेकिन मुझे लगता है कि ये भू-राजनीति स्तर पर भी ये बहुत बड़ी घटना थी. आज जब मैं सुबह-सुबह न्यूज़ देख रही थी तो कई देशों ने इस पहलगाम आतंकी हमले के एक वर्ष पूरे होने पर अपना दुख जताया है. पीएम मोदी ने पहलगाम आतंकी हमले के एक वर्ष पूरे होने पर सुबह ट्वीट किया कि उन्हें 26 परिवारों के लिए दुख है. ये ऐसी घटना है जिसने सिर्फ 26 परिवारों को नहीं बल्कि पूरे देश और दुनिया पर प्रभाव डाला है.
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“पूरी तरीके से आतंकवाद खत्म करेंगे”
उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद जिस तरह से हमारे देश ने कदम उठाया है चाहे वो ऑपरेशन सिंदूर हो और चाहे ऑपरेशन महादेव हो तो ये बहुत जरूरी है कि हम ऐसे कदम उठाते रहे जो हमेशा आतंकवाद के खिलाफ हो जब तक आतंकवाद पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता क्योंकि ये देश कई बार आतंकवाद से परेशान हो चुका है लेकिन अब ये हाई टाइम है कि अब हमें उनकी आंखों में देखकर बोलना जरूरी है कि अब हमें ये बर्दाश्त नहीं है और अब हम पूरी तरीके से आतंकवाद खत्म करेंगे.
“सोचा था कि बेटे को इस तरह खोना पड़ेगा”
वहीं शुभम द्विवेदी के पिता शुभम द्विवेदी ने कहा कि शुभम बचपन से ही बहुत तेज, समझदार और हंसमुख स्वभाव का था. उसके चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती थी. वो जब भी किसी से मिलता था मुस्कुराकर मिलता था. आज भी हर पल शुभम का मुस्कुराता चेहरा आंखों के सामने घूमता रहता है. शुभम उनका इकलौता बेटा था, कभी नहीं सोचा था कि बेटे को इस तरह खोना पड़ेगा. बेटे के दुनिया से जाने के बाद परिवार की सारी जिम्मेदारियां वो खुद निभा रहे हैं. उन्होंने बहू ऐशान्या द्विवेदी बहू के बारे में भावुक बातें कही, कहा कि बहू उनके साथ बेटी की तरह रहती है. परिवार ने हमेशा उसे बेटी जैसा सम्मान दिया है. पूरा परिवार एक-दूसरे का सहारा बनकर जी रहा है. दुख बड़ा है, लेकिन साथ रहने से हिम्मत मिलती है.



