Sawariya Seth Mandir: राजस्थान के चितौड़गढ़ के श्रीसांवलिया सेठ मंदिर ने दान राशि को लेकर नया रिकॉर्ड बनाया है. मंदिर को एक महीने में कुल 41 करोड़ 67 लाख 38 हजार 569 रुपए चढ़ावा मिला है. बीते 16 अप्रैल को मंदिर का भंडार गृह खोला गया था. 7 राउंड की गिनती में भंडार से कुल 33 करोड़ 21 लाख 63 हजार 539 रुपए प्राप्त हुए है. वहीं भेंटकक्ष और ऑनलाइन माध्यम से 8 करोड़ 45 लाख 75 हजार 30 रुपए मिले हैं. इसके अलावा करीब 1 करोड़ रुपए का सोना और चांदी भी चढ़ाई में आई है.
एडीएम और मंदिर मंडल की सीईओ प्रभा गौतम ने बताया कि इस महीने भंडार, भेंटकक्ष और ऑनलाइन माध्यम से कुल 41 करोड़ 67 लाख 38 हजार 569 रुपए की दान राशि प्राप्त हुई है. वो 29 दिन में मिली सबसे ज्यादा राशि है. इससे पहले, साल 2025 अप्रैल माह में भंडार से करीब 25 करोड़ रुपए चढ़ावे में मिले थे, जो एक महीने में सबसे ज्यादा थे.
मोरपंख और 56 भोग लगाने की परंपरा बंद
श्रीसांवलिया सेठ मंदिर में मोरपंख और 56 भोग की परंपरा को बंद कर दिया गया है. भक्तों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन की ओर से यह निर्णय लिया गया है. नए नियम के अनुसार, भक्त सिर्फ भंडार में नकद राशि या सोना-चांदी जैसी भेंट ही दे सकेंगे. दर्शन के लिए उन्हें खाली हाथ ही मंदिर में जाना होगा. मंदिर में दर्शन की नई व्यवस्था लागू की गई है.
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श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ रही भीड़ बनी वजह
श्रीसांवलिया सेठ मंदिर मंडल के अध्यक्ष हजारीदास वैष्णव के अनुसार, पिछले कुछ समय से श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है. भोग चढ़ाने वालों की संख्या भी ज्यादा हो गई थी. भोग चढ़ाने के लिए लोग समूह में आते हैं और गर्भगृह के सामने काफी देर तक रुकते हैं. इससे बाकी के श्रद्धालुओं को भी परेशानी होती थी. खासकर 56 भोग लगाने में करीब एक घंटा लग जाता था. इसके अलावा कुछ लोग गाजे-बाजे के साथ आकर नाचते-गाते हुए मंदिर परिसर में घूमते थे, जिससे भीड़ हो जाती थी.
इसके अलावा बाजार में बिक रही नकली सामग्री भी वजह बनी. मंदिर प्रशासन के अनुसार, हाल ही में नकली मावे से बनी मिठाइयां, नकली मोरपंख और कृत्रिम फूल बड़ी मात्रा में उपयोग होने लगे थे, जो धार्मिक भावना को लिहाज से ठीक नहीं थे. इन कारण इन सभी चीजों पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है.



