Women Reservation Bill Controversy:राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौर ने संविधान (131वां संशोधन) बिल लोकसभा में पास नहीं होने पर कहा कि विपक्ष का व्यवहार हमेशा महिला विरोधी रहा है. कांग्रेस महिलाओं को साइलेंट वोटर मानकर चलती थी. शाह बानो के केस में भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदल दिया और उसके अधिकार का हनन कर दिया. ये उसका हक था. सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बदलने के लिए संविधान में संशोधन कर दिया. मुस्लिम बहनों को तीन तलाक का दर्द झेलना पड़ता था विपक्ष ने इसको समाप्त करने के लिए कुछ नहीं किया जबकि पीएम मोदी ने समाप्त किया. उन्होंने महिलाओं को सम्मान से जीने का अवसर दिया. अभी जो ये बिल लाया गया था इसमें विपक्ष को समर्थन करना चाहिए था. उसमें कांग्रेस ने हठधर्मी दिखाई है.
“यह कोशिश पूरी तरह विफल साबित हुई”
राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं के नाम पर केवल राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन आज उनकी यह कोशिश पूरी तरह विफल साबित हुई. कांग्रेस हमेशा से महिला आरक्षण की पक्षधर रही है, क्योंकि यह देश की महिलाओं का अधिकार है और उन्हें मिलकर रहेगा. लेकिन भाजपा सरकार ने इस महत्वपूर्ण विषय को भी राजनीति का माध्यम बना दिया. इसे 2011 की जनगणना और उससे जुड़े परिसीमन से जोड़ना उनकी वास्तविक मंशा और सोच को उजागर करता है.
उन्होंने आगे लिखा कि संशोधन विधेयक का गिरना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है. महिलाओं के नाम पर संविधान को कमजोर करने के लिए जिस असंवैधानिक तरीके का सहारा लिया गया, उसे देश ने नकार दिया है. आज देश के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के नेताओं की एकजुटता ने लोकतंत्र की मूल भावना और देश की अखंडता की रक्षा की है. यह एकजुटता ही है जिसने संविधान और लोकतंत्र को सुरक्षित रखने का कार्य किया है.
“लोग इनकी चालों को जानते हैं”
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संविधान संशोधन(131वां संशोधन) बिल के लोकसभा में पारित न होने पर कहा कि उन्होंने पूरे देश को गुमराह किया और ऐसे हालात पैदा किए कि यह बिल पास न हो और विपक्ष पर आरोप लगाया जाए. देश के लोग समझते हैं. 2023 में इस कानून को पक्ष और विपक्ष ने मिलकर पास किया था. उन्हें सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए थी. दक्षिण राज्य और पूर्वी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बुलाना चाहिए था. लोग इनकी चालों को जानते हैं.



