JJM Scam: राजस्थान में जल जीवन मिशन से जुड़े कथित घोटाले के आरोप में गिरफ्तार सेवानिवृत आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को एसीबी ने आज सोमवार को रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद कोर्ट में पेश किया. रिटायर्ड IAS को 2 दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया है. पेशी पर जाते समय सुबोध अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत की उन्होंने कहा कि मैंने जांच में पूरा सहयोग किया है. मुझसे जो सवाल पूछे गए, मैंने उनके जवाब दिए. फाइनेंस कमेटी के 37 मामलों में से केवल 4 ही उनके कार्यकाल के हैं. बाकि के 33 मामले सुधांश पंत के समय के हैं जिसकी राशि 600 करोड़ रुपए के करीब है. सुधांश पंत उस दौरान जलदाय विभाग की फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन थे.
सुबोध अग्रवाल ने आगे कहा कि मैंने एसीबी को बार-बार कहा है जिसमें पैसा नहीं लिया उसका नाम ले रहे हो, जिसमें पैसा लिया उसकी जांच नहीं कर रहे. सुधांश पंत जलदाय विभाग में फाइनेंस कमेटी के अध्यक्ष 15 जनवरी 2021 से 18 अप्रैल 2022 तक रहे. जबकि सुबोध अग्रवाल जलदाय विभाग के फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन 18 अप्रैल 2022 से 17 मई 2023 तक रहे. बता दें कि सुबोध अग्रवाल से सवाल-जवाब के लिए एसीबी ने करीब 125 सवालों की विस्तृत सूची तैयार की थी. इन्हीं सवालों के आधार पर पिछले 3 दिनों में उनसे लंबी पूछताछ की गई.
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क्या है 960 करोड़ रुपए का जल जीवन मिशन घोटाला?
यह पूरा मामला घर-घर नल से जल पहुंचाने वाली केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना जल जीवन मिशन में बड़े स्तर पर हुई धांधली से जुड़ा है-:
1.निरीक्षण में लापरवाही: नियमों के अनुसार 50 करोड़ रुपए से ज्यादा के टेंडर में अधिकारियों को मौके पर जाकर भौतिक निरीक्षण करना था, लेकिन अधिकारियों ने ऑफिस में बैठकर ही फाइलें पास कर दी.
2. फर्जी सर्जिफिकेट खेल: जांच में पता चला है कि मैसर्स गणपति ट्यूबबैल और मैसर्स श्याम ट्यूबबैल नामक फर्मों ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र तैयार कर करोड़ों के टेंडर हासिल किए थे.
3. अधिकारियों की मिलीभगत: सुबोध अग्रवाल और अन्य अधिकारियों को फर्जी सर्टिफिकेट्स के बारे में जानकारी थी. इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. चुनिंदा फर्मों को फायदा पहुंचाने के लिए पद का दुरुपयोग किया गया.



