बीजेपी की केंद्र सरकार बनने के बाद से ही देश की राजनीति में नाम बदलने को लेकर लगातार बहस और सियासत देखने को मिल रही है. कभी शहरों और सड़कों के नाम बदले जाते हैं तो कभी सरकारी योजनाओं और संस्थानों के नामों में बदलाव किया जाता है. एक तरफ जहां सरकार का तर्क है कि इन बदलावों के जरिए देश की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक पहचान और भारतीय परंपराओं को सम्मान दिया जा रहा है, जबकि विपक्ष इसे मुद्दों से ध्यान भटकाने और राजनीतिक एजेंडे से जोड़कर देखता है. हर बार जब किसी जगह या योजना का नाम बदलता है, तो उसके पक्ष और विपक्ष में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं.
“बीजेपी-संघ की साजिश है” जैसा कि अब फिर से देखा जा रहा है. केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम मनरेगा की जगह पर एक नया कानून लाने की तैयारी कर रही है.. मनरेगा को खत्म करने के लिए लाए गए बिल पर संसद में चर्चा चल रही है…कांग्रेस का कहना है कि यह सिर्फ नाम बदलने की नहीं, बल्कि कांग्रेसी विरासत को खत्म करने की बीजेपी-संघ की साजिश है… कांग्रेस इस बिल का जोरदार विरोध कर रही है. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि इस बिल से जो रोजगार का कानूनी अधिकार है, वो कमजोर हो रहा है. विकसित भारत G RAM G बिल सत्ता को केंद्रीकृत करता है और मनरेगा के तहत पहले से गारंटी वाले अधिकारों को कमजोर करता है. उन्होंने गैर-जरूरी बदलावों के पीछे के तर्क पर सवाल उठाते हुए कहाँ कि इसमें भारी खर्च होता है और स्थानीय शासन कमजोर होता है.
“देखो दीवानों ये काम ना करो, राम का नाम बदनाम मत करो” पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने भी संसद में बिल का विरोध किया. उन्होंने शायराना अंदाज़ में कहा, ‘देखो दीवानों ये काम ना करो, राम का नाम बदनाम मत करो. थरूर ने बिल को स्टैंडिंग कमेटी को भेजने की मांग का समर्थन किया. मनरेगा विवाद पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मोदी सरकार को घेरा है. उन्होंने कहा कि संघ की शताब्दी पर गांधी का नाम हटाना दिखाता है कि मोदी जी की तरह जो लोग विदेशी धरती पर बापू को फूल चढ़ाते हैं, वे कितने खोखले और पाखंडी हैं, जो सरकार गरीबों के अधिकारों से मुंह मोड़ती है और मनरेगा पर हमला करती है.
“राम का नाम जुड़ते ही इन लोगों को परेशानी हो जाती है” वहीं मनरेगा बिल पर विपक्ष की आपत्ति के बाद कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राम का नाम जुड़ते ही इन लोगों को पता नहीं क्या परेशानी हो जाती है. महात्मा गांधी खुद राम राज की बात करते थे और उनके अंतिम शब्द भी हे राम थे. हर गरीब को बेरोजगार मिले और उसकी गरिमा का सम्मान हो, गरीब, जनजाति और पिछड़ो को रोजगार मिले और उसके लिए यह बिल आया है. 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी. जिससे कृषि और मजदूरी के बीच संतुलन स्थापित होगा. यह पूरा बिल महात्मा गांधी के अनुरूप है और राम राज्य की स्थापना के लिए लाया जा रहा है. मुझे समझ नहीं आता कि राम नाम जुड़ते ही इन लोगों को बिल से क्या आपत्ति हो गई है, जबकि भगवान राम तो खुद ही राम राज्य की बात करते थे.



