Panchayati Raj and local bodies Elections : ने एक बार फिर राज्य सरकार को पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव में देरी के लिए जिम्मेदार बताया है। इससे पूर्व भी हाईकोर्ट राज्य सरकार से नगर निकाय और पंचायती राज चुनाव कराने के बारे में दो बार पूछ चुका है और समय भी तय कर चुका। एक बार फिर हाईकोर्ट में आयोग की तरफ से राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने साफ कहा कि निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं में एससी, एसटी और महिला आरक्षण तय किए बिना चुनाव नहीं हो सकते। आरक्षण की लॉटरी निकालना पंचायतीराज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग का काम है। हमने इसके लिए छह चिट्ठियां लिखी हैं।
कोर्ट की अवमानना याचिका पर सुनवाई
हाईकोर्ट में अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह गुरुवार को वीसी के जरिए पेश हुए। राजेश्वर सिंह ने आयोग के बचाव में तर्क देते हुए साफ कर दिया कि आयोग तो दो दिन में चुनाव की घोषणा को तैयार है लेकिन उसे सरकार ने आरक्षण तय करके ही नहीं दिया।
आयोग की ओर से कोर्ट को दिया जवाब
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने हाईकोर्ट में अपने जवाब में कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग अपनी तरफ से पूरी तरह तैयार है। हमने वोटर लिस्ट तैयार कर ली है, इसके अलावा दूसरे राज्यों से ईवीएम की भी व्यवस्था कर रखी है। जितनी तैयारी चुनाव के लिए हो सकती हैं, सारी तैयारियां पूरी हैं। सबसे बड़ी बाधा पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों में वार्डों और उनके चेयरपर्सन का रिजर्वेशन है, वो राज्य सरकार की तरफ से पूरा नहीं किया गया है।
हमारी संवैधानिक बाध्यता है आरक्षण देना
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने कोर्ट को कहा कि एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं को आरक्षण देना हमारी कानूनी और संवैधानिक बाध्यता है। पिछली बार हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि ओबीसी कमिशन की रिपोर्ट के बिना भी चुनाव करवा सकते हैं। एससी-एसटी और महिलाओं का आरक्षण राज्य सरकार को ही तय करना है। इसके लिए इनको हम छह चिट्ठियां लिख चुके हैं। तीन चिट्ठी पंचायती राज और तीन स्वायत्त शासन विभाग को लिख चुके हैं।
चुनाव की घोषणा कैसे करें ?
राजेश्वर सिंह ने हाईकोर्ट में कहा- उसके जवाब में इन्होंने यह अवगत करवाया कि ओबीसी कमिशन 14 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट देगा और उसके बाद आरक्षण की लॉटरी निकालेंगे। वार्डों को एएसी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं के लिए आरक्षित करने का काम ये 21 अगस्त तक पूरा करेंगे। राजेश्वर सिंह ने कहा- ऐसी स्थिति में हम लोगों के लिए बड़ा मुश्किल है कि हम कैसे चुनाव की घोषणा करें? यह तय करना मुश्किल होगा। आज हम अगर चुनाव की प्रक्रिया घोषित भी कर देते हैं तो यह पता करना मुश्किल होता है कि किस कैटेगरी का व्यक्ति किस वार्ड से चुनाव लड़ेगा? सरकार रिजर्वेशन तय करके दे दे तो हम 2 दिन में चुनाव की घोषणा करने को तैयार हैं। हम ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट बिना भी चुनाव करवा सकते हैं, लेकिन एससी, एसटी, महिला आरक्षण की रिपोर्ट नहीं मिली।
सरकार ने कहा- हम टाइम बढ़ाने की एप्लीकेशन दायर कर रहे
सरकार ने कहा- हम टाइम बढ़ाने की एप्लीकेशन दायर करने जा रहे हैं। उसमें उन्होंने बताया कि 14 अगस्त तक ओबीसी कमिशन की रिपोर्ट आएगी, 21 अगस्त तक लॉटरी निकाल कर दे देंगे। लॉटरी निकलने का काम राज्य सरकार के अफसर करते हैं।
चुनावों में देरी के लिए हाईकोर्ट ने लगाई थी फटकार
31 जुलाई तक पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनाव नहीं करवाने पर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और ओबीसी आयोग को फटकार लगाते हुए नाराजगी जाहिर की थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि जब हमने 31 जुलाई तक चुनाव करवाने के आदेश दिए थे तो फिर 14 अगस्त तक ओबीसी आयोग की रिपोर्ट की तारीख कहां से ले आए? 20 जुलाई को इस मामले में जब सुनवाई हो तो आरक्षण की लॉटरी की तारीख, चुनाव घोषणा की तारीख और ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट की जुलाई की तारीख चाहिए। यह अगस्त नहीं होनी चाहिए। हम 14 अगस्त तक इंतजार नहीं कर सकते। हाईकोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा था- 14 अगस्त भारत के लिए कोई अच्छा दिन नहीं है। यह तारीख कहां से आई, यह भारत के लिए बहुत बुरा दिन था। इसी दिन ब्रिटिशर्स ने भारत के दो टुकड़े किए थे। हाईकोर्ट ने देरी पर यह भी कहा था कि अगर राज्य निर्वाचन आयोग से नहीं होता तो हम रिटायर्ड जज को नियुक्त् कर देते हैं, वो चुनाव करवा देंगे।
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