बिहार के नालंदा जिले से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जहां एक व्यक्ति करीब 41 साल तक एक परिवार में फर्जी बेटे के रूप में रहता रहा और इस दौरान लगभग 2 करोड़ रुपये की संपत्ति हड़प कर चुका था। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार सच सामने आया और कोर्ट ने आरोपी को सजा सुनाई।
कैसे शुरू हुई ठगी की कहानी?
नालंदा जिले के एक प्रतिष्ठित परिवार का असली बेटा वर्ष 1977 में 10वीं की परीक्षा देने चंडी गया था, लेकिन वहीं से वह रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया। परिवार ने व्यापक खोजबीन की, FIR दर्ज कराई, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला।
करीब पांच साल बाद, 1981 में एक युवक साधु के वेश में गांव पहुंचा और खुद को लापता बेटे के रूप में पेश करने लगा। बुजुर्ग परिवारजन, विशेषकर पिता, उसे सही मान बैठे क्योंकि उनकी तबीयत भी ठीक नहीं रहती थी और पहचानने की क्षमता कम हो गई थी।
मां ने तुरंत पहचान लिया सच
जब कुछ दिनों बाद बच्चे की मां गांव लौटी, तो उसने तुरंत पहचान लिया कि यह व्यक्ति उनका बेटा नहीं है। असली बेटे के सिर पर चोट का निशान था, जबकि इस युवक पर ऐसा कोई निशान नहीं था। परिवार में बहस हुई, लेकिन तबीयत से कमजोर बुजुर्ग पिता इस मुद्दे पर ज्यादा ठोस कदम नहीं उठा सके।
कुछ समय बाद जैसे ही पिता की तबीयत ठीक हुई, फर्जी बेटे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई।
कानूनी लड़ाई 40 साल तक चलती रही
1981 में केस दर्ज हुआ, 1991 में मामला टाइटल सूट के तौर पर कोर्ट में चला। इस बीच असली माता-पिता की मृत्यु हो गई, लेकिन उनकी बेटी ने लड़ाई जारी रखी।
इसी दौरान आरोपी चार दशक से अधिक समय तक उसी घर में रहा, और खुद को मालिकाना हक बताते हुए:
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लगभग 50-55 बीघा जमीन बेच दी
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पाइपलाइन मैंटेनेंस और इंस्टॉलेशन का मुआवजा भी लिया
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करोड़ों की संपत्ति का गबन किया
DNA टेस्ट से बचता रहा आरोपी
साल 2014 से कोर्ट में DNA टेस्ट की मांग की जा रही थी, लेकिन आरोपी लगातार इससे बचता रहा। आखिरकार 2022 में उसने लिखित रूप से DNA जांच से इंकार कर दिया।
कोर्ट ने कई बिंदुओं पर आरोपी को दोषी पाया:
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सिर पर असली बेटे वाला कट मार्क नहीं
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1977 से 1981 तक वह कहां रहा— इसका जवाब नहीं
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DNA टेस्ट कराने से इनकार
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परिवार को धोखे में रखकर संपत्ति बेचना
41 साल बाद मिला न्याय
नालंदा की अदालत ने आरोपी को 3 साल की सजा और 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना न देने पर 3 महीने की अतिरिक्त जेल होगी।
हालांकि इस पूरे मामले में सबसे दुखद यह है कि असली बेटे का आज तक कोई पता नहीं चल पाया है, और परिवार की तलाश अधूरी ही रह गई।



