इंदौर शहर में पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सामने आया है कि कई मामलों में पुलिस ने बार‑बार सिर्फ दो ही व्यक्तियों को गवाह बनाकर अदालत में पेश किया। यह पैटर्न न केवल जांच प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि कई केस कमजोर होने का खतरा भी बढ़ाता है। मामले के सामने आने के बाद अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है और जिम्मेदारों पर कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
बार‑बार वही दो गवाह क्यों?
जानकारी के अनुसार खजराना थाना क्षेत्र में 2022 से 2023 के बीच दर्ज मामलों में पुलिस ने दो लोगों—नवीन और इरशाद—को ही दर्जनों बार गवाह के रूप में इस्तेमाल किया। दोनों को अलग-अलग मामलों में गवाह बनाकर पेश किया जाता रहा, जिससे यह संदेह पैदा हुआ कि ये “पॉकेट गवाह” हैं।
बताया जा रहा है कि करीब 1250 मामलों में सिर्फ यही दो गवाह पेश किए गए, जिससे केस की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में आरोपियों के अदालत से बरी होने की संभावना बढ़ जाती है।
केस डायरी और गवाह प्रस्तुत करने में लापरवाही
जांच में यह भी सामने आया कि:
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265 मामलों में केस डायरी समय पर कोर्ट तक नहीं पहुंची
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333 मामलों में पुलिस गवाह ही लेकर अदालत नहीं पहुंची
इन लापरवाहियों पर अदालत ने सख्त टिप्पणी की है, जिसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।
अधिकारियों को नोटिस, जांच तेज
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। खजराना के तत्कालीन थाना प्रभारी को नोटिस भेजकर विस्तृत जवाब मांगा गया है। पहले नोटिस का जवाब न मिलने पर अब दूसरा नोटिस जारी किया जा रहा है। अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि किन‑किन मामलों में पॉकेट गवाहों का इस्तेमाल किया गया और इससे किस स्तर पर न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हुई।



