उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक गर्भवती महिला के दो अलग-अलग अल्ट्रासाउंड रिपोर्टों में जुड़वा बच्चे होने की पुष्टि हुई, लेकिन प्रसव के समय परिवार को सिर्फ एक ही बच्ची दी गई। इस पूरे मामले को लेकर परिवार ने गंभीर सवाल उठाए हैं और अस्पताल प्रशासन ने भी जांच शुरू कर दी है।
दो अल्ट्रासाउंड, दोनों में जुड़वा—फिर एक बच्चा कैसे?
गजनेरा गांव निवासी सुरेश बाबू की पत्नी राजेश्वरी देवी ने करीब तीन महीने पहले एक निजी केंद्र पर अल्ट्रासाउंड कराया था। रिपोर्ट में दो भ्रूण दिखाए गए थे। इसके बाद महिला अस्पताल में कराया गया सरकारी अल्ट्रासाउंड भी जुड़वा बच्चों की ही पुष्टि करता है।
लेकिन 8 दिसंबर को जब प्रसव हुआ तो परिवार को एक ही बच्ची दी गई। यह देखकर परिवार पूरी तरह हैरान रह गया।
दूसरा बच्चा कहाँ? परिवार के सवाल गहराए
परिवार के लोगों ने जब अस्पताल स्टाफ से सवाल पूछा तो उन्हें कभी “तकनीकी त्रुटि”, कभी “गलत रिपोर्ट” का बहाना बताया गया।
राजेश्वरी के पति सुरेश के अनुसार:
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सरकारी अल्ट्रासाउंड की मूल रिपोर्ट मांगी गई, लेकिन स्टाफ ने देने से मना कर दिया।
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निजी सेंटर सहित कई डॉक्टरों ने बताया कि यदि रिपोर्ट में दो फेटस दर्ज हैं, तो डिलीवरी में भी दो ही बच्चे होने चाहिए—चाहे जीवित हों या मृत।
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रिपोर्ट न मिलने से परिवार को शक गहराता जा रहा है।
प्रसव कक्ष में मौजूद दादी को बाहर भेजना भी बढ़ा शक
सुरेश ने बताया कि प्रसव कक्ष में दादी मौजूद थीं, लेकिन स्टाफ ने उन्हें कुछ मिनटों के लिए बाहर भेज दिया। कुछ समय बाद उन्हें एक बच्ची पकड़ाकर बताया गया कि जन्म हो गया है।
दादी को जुड़वा बच्चों की जानकारी नहीं थी, इस कारण उन्होंने कोई प्रश्न नहीं किया और अस्पताल स्टाफ को बधाई स्वरूप पैसे भी दे दिए।
परिवार का कहना है कि अगर दादी को पहले से जुड़वा की जानकारी होती, तो वे उसी समय सवाल करतीं।
अस्पताल प्रशासन ने शुरू की जांच
महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद ने बताया कि:
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परिवार द्वारा दिखाए गए दोनों अल्ट्रासाउंड जुड़वा होने की पुष्टि करते हैं।
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केस शीट में सिर्फ एक बच्ची के जन्म का ही रिकॉर्ड दर्ज है।
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मामला गंभीर है, इसलिए आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है।
अभी तक परिवार की ओर से लिखित शिकायत नहीं दी गई है, लेकिन अस्पताल प्रशासन का कहना है कि पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की जाएगी।



