Farmers News : सरसों बाजार में आ चुकी है किंतु उसकी खरीद की तारीख भी अभी तक सुनिश्चित नहीं हुई है, जिससे किसानों को उसे न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी वंचित होना पड़ रहा है, जिसे सरकार ने घोषित किया है। गेहूं की खरीद के लिए 15 मार्च से खरीद करने की घोषणा हो चुकी है, जबकि गेहूं कि अभी कटाई भी आरंभ नहीं हुई है। सरसों खरीद के लिए पिछले 5 वर्षों से किसान खरीद 1 फरवरी से आरंभ करने आग्रह कर रहे हैं। बिना खरीद के न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा थोथा चना बाजे घणा जैसी है। यह बात किसान नेता रामपाल जाट ने कही है।
खरीद की गारंटी का कानून बनाया जाये
राष्ट्रीय अध्यक्ष किसान महापंचायत रामपाल जाट ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने की सार्थकता तब ही है जब उसकी प्राप्ति की सुनिश्चितता हो, और यह तभी संभव है जब न्यूनतम समर्थन मूल्य की प्राप्ति के लिए खरीद की गारंटी का कानून बनाया जाये। इसके लिए प्रधानमंत्री द्वारा गठित समिति के उपसमूह ने 21 अप्रैल 2023 को अनुशंसा कर दी थी, जिसे भी 3 वर्ष का समय पूरा होने वाला है किंतु सरकार ने अभी तक इस पर सार्थक कार्यवाही नहीं की। इसी प्रकार सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य को गारंटीड मूल्य वर्ष 1968 से घोषित किया हुआ है, इसके बाद भी संसद में अनेकों बार सरकार ने इसको दोहराया है, इतना ही नहीं तो संसद में घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दामों में अपनी उपज बेचने के लिए विवश नहीं होने देने का आश्वासन दिया हुआ है।
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भारत के बाजार अमेरिका को
रामपाल जाट ने कहा कि भारत सरकार व्यापारिक समझौते के अंतर्गत भारत के बाजार अमेरिका को उपलब्ध कराने के लिए आतुर है, उस प्रकार की कार्यवाही देश के किसानो को उनकी उपजो का लाभकारी मूल्य दिलाने की कार्यवाही नहीं कर रही है। इसीलिए आज निर्यात नीति के केंद्र में किसान हित नहीं रहता है। यह स्थिति तो तब है जब कृषि लागत एवं मूल्य आयोग में अनेकों बार खरीद की गारंटी का कानून बनाने, खरीद की सुनिश्चितता करने तथा आयात निर्यात नीति किसने के हितों के अनुकूल बनाने के संबंध में अनुशंसाएं की हुई है। पिछले 60 वर्षों में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग द्वारा की गई किसान हितेषी अनुशंसाओ की पालना नहीं करने की समीक्षा को सार्वजनिक करने का आग्रह किया है।
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