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Makar Sankranti 2026: क्या उत्तरायण में देह त्यागने से मिलती है मोक्ष? जानिए शास्त्रों में क्या कहा गया है

Makar Sankranti 2026: क्या उत्तरायण में देह त्यागने से मिलती है मोक्ष

सनातन धर्म में मकर संक्रांति को अत्यंत पावन और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पर्व माना गया है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण काल की शुरुआत होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उत्तरायण को देवताओं का काल कहा जाता है, इसलिए इसे मोक्ष का मार्ग भी माना गया है।

ऐसे में अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या मकर संक्रांति या उत्तरायण के समय मृत्यु होने से आत्मा को जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिल जाती है? शास्त्रों और भगवद्गीता में इस विषय पर विस्तार से बताया गया है।

उत्तरायण का आध्यात्मिक महत्व

मकर संक्रांति के साथ सूर्य की उत्तर दिशा की यात्रा शुरू होती है, जिसे उत्तरायण कहा जाता है। मान्यता है कि इस काल में ब्रह्मांड में सकारात्मक ऊर्जा और चेतना का स्तर बढ़ जाता है। यही कारण है कि इस समय स्नान, दान, जप और तप का विशेष फल प्राप्त होता है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार उत्तरायण को देवताओं का ‘दिन’ और दक्षिणायन को उनकी ‘रात्रि’ कहा गया है। सूर्य के मकर राशि की ओर अग्रसर होने को देवताओं की जागृति का समय माना जाता है।

भगवद्गीता में क्या कहा गया है?

श्रीमद्भगवद्गीता के आठवें अध्याय (अक्षर ब्रह्म योग) में भगवान श्रीकृष्ण ने मृत्यु के बाद आत्मा की गति के बारे में बताया है। उन्होंने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति का देहांत अग्नि, प्रकाश, दिन, शुक्ल पक्ष और उत्तरायण के समय होता है, तो वह ब्रह्म को प्राप्त करता है, यानी मोक्ष की ओर अग्रसर होता है।

हालांकि, शास्त्र यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल समय ही नहीं, बल्कि व्यक्ति का कर्म, भक्ति और जीवन की साधना भी मोक्ष प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

भीष्म पितामह से जुड़ा प्रसिद्ध उदाहरण

महाभारत काल में भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था। युद्ध के दौरान बाणों की शय्या पर लेटे होने के बावजूद उन्होंने प्राण त्याग नहीं किए और उत्तरायण के आने की प्रतीक्षा की। मकर संक्रांति के दिन उन्होंने देह त्याग किया, जिसे मोक्ष प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है।

यह कथा इस विश्वास को और मजबूत करती है कि उत्तरायण में शरीर त्याग करना आध्यात्मिक रूप से विशेष माना जाता है।

क्या सिर्फ इसी समय मृत्यु से मोक्ष मिलता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उत्तरायण का समय अत्यंत शुभ है, लेकिन शास्त्र यह भी कहते हैं कि मोक्ष केवल समय से नहीं, बल्कि आत्मज्ञान, भक्ति, निष्काम कर्म और ईश्वर-स्मरण से प्राप्त होता है। उत्तरायण को मोक्ष का द्वार इसलिए कहा गया है क्योंकि इस काल में साधना और चेतना अधिक प्रभावी मानी जाती है।

निष्कर्ष

मकर संक्रांति और उत्तरायण का समय आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। इस काल में की गई पूजा, दान और साधना का विशेष फल मिलता है। हालांकि, मोक्ष केवल किसी विशेष तिथि पर निर्भर नहीं करता, बल्कि व्यक्ति के कर्म और ईश्वर-भक्ति पर आधारित होता है।

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