Lohri 2026: लोहड़ी उत्तर भारत का सबसे रंगीन और ऊर्जावान त्योहार है, जो 13 जनवरी 2026 (मंगलवार) को बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा। यह पर्व मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले आता है और सर्दियों के अंत, लंबे दिनों की शुरुआत, रबी फसल की कटाई और खुशहाली का प्रतीक है। मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और आसपास के इलाकों में मनाया जाता है, जहां लोग अग्नि के चारों ओर इकट्ठा होकर भांगड़ा-गिद्दा करते हैं, लोकगीत गाते हैं और तिल-गुड़ की मिठाइयां बांटते हैं।
लोहड़ी का महत्व और परंपरा
लोहड़ी सूर्य देव और अग्नि देव को समर्पित है। अग्नि को देवताओं का मुख माना जाता है, इसलिए लोग पवित्र अलाव में तिल, गुड़, मूंगफली, रेवड़ी, खील, चिक्की और गेहूं की बालियां अर्पित करते हैं। माना जाता है कि इससे देवताओं तक फसल का हिस्सा पहुंचता है और आने वाले साल में अच्छी उपज, सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य मिलता है।यह त्योहार कृषि समाज की मेहनत, एकता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का उत्सव है। शाम को प्रदोष काल में अग्नि जलाना सबसे शुभ माना जाता है।
इस साल(Lohri 2026) का शुभ मुहूर्त:
- सूर्यास्त का समय (दिल्ली/पंजाब में): लगभग 5:44 PM
- शुभ मुहूर्त (अग्नि प्रज्वलन और पूजन): सूर्यास्त के बाद 2 घंटे, यानी शाम 5:45 PM से 8:00 PM तक (गोधूली मुहूर्त में विशेष फलदायी)।
दुल्ला भट्टी की प्रसिद्ध कथा
लोहड़ी में सबसे ज्यादा गाया जाने वाला गीत “सुंदर मुंडरिये हो! तेरा कौन विचारा हो? दुल्ला भट्टी वाला हो!” मुगल काल के पंजाबी नायक दुल्ला भट्टी (राय अब्दुल्ला खान भट्टी) की याद दिलाता है। वे अकबर के समय के “पंजाब के रॉबिन हुड” थे, जो अमीरों से लूटकर गरीबों में बांटते थे। खासकर उन्होंने गरीब लड़कियों को गुलामी से बचाया, उनकी शादी करवाई और दहेज दिया। इसी वजह से लोहड़ी पर उन्हें याद किया जाता है और महिलाओं-बच्चों को विशेष महत्व दिया जाता है।
नवविवाहितों के लिए लोहड़ी क्यों खास? (पहली लोहड़ी का जश्न)
शादी के बाद पहली लोहड़ी (पहली लोहड़ी ऑफ ब्राइड) को बहुत शुभ और यादगार माना जाता है। यह नई शुरुआत, सौभाग्य, प्रजनन क्षमता और परिवार में दुल्हन के स्वागत का प्रतीक है।
- परिवार बड़े उत्साह से मनाता है।
- सास-ससुर और रिश्तेदार नई बहू को कपड़े, गहने, मिठाइयां और उपहार देते हैं।
- दुल्हन को मेहंदी लगवाकर, चूड़ियां पहनाकर और बिंदी लगाकर तैयार किया जाता है।
- रंग-बिरंगे ट्रेडिशनल आउटफिट (फुलकारी, सलवार सूट) में वो अलाव के चारों ओर नाचती-गाती है।
यह पर्व दंपति के लिए समृद्धि, खुशी और फर्टिलिटी की कामना करता है।
नई दुल्हन न करें ये गलतियां
- काले रंग के कपड़े बिल्कुल न पहनें – यह अशुभ माना जाता है।
- पति या परिवार से वाद-विवाद न करें – शांत और खुश रहें।
- बुजुर्गों का आशीर्वाद जरूर लें और अग्नि की परिक्रमा करें।
- ट्रेडिशनल और ब्राइट कलर्स में सजें – मेहंदी, चूड़ियां, बिंदी लगाएं।
- अलाव में तिल-गुड़ अर्पित करें और खुशियां मनाएं।
कैसे मनाएं लोहड़ी 2026?
- शाम को बोनफायर जलाएं।
- भांगड़ा-गिद्दा करें, लोकगीत गाएं।
- तिल-गुड़ की मिठाइयां बांटें।
- परिवार और दोस्तों के साथ इकट्ठा हों।
लोहड़ी सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि उम्मीद, गर्मजोशी और नए साल की शुरुआत का संदेश है।



