Religion and tradition:भारत में हिमालय की वादियों से लेकर कन्याकुमारी तक ऐसे कई प्राचीन मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी कथाएं आज भी लोगों को आकर्षित करती हैं। इन्हीं में से एक है मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित मां शारदा का प्रसिद्ध धाम, जिसे मैहर माता मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह भक्तों के लिए गहरी आस्था का केंद्र है, जहां सालभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। खासकर चौत्र और शारदीय नवरात्रि के समय यहां लाखों भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं।
बंद कपाटों के बाद भी गूंजती हैं घंटियां
मैहर माता मंदिर से जुड़ी एक रहस्यमयी मान्यता लोगों को आज भी हैरान कर देती है। कहा जाता है कि जब शाम को मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं और आसपास सन्नाटा छा जाता है, तब भी भीतर से लगातार घंटियों की आवाज सुनाई देती रहती है। यह घटना वर्षों से लोगों की आस्था और जिज्ञासा का केंद्र बनी हुई है। लोकमान्यता के अनुसार, देवी के परम भक्त आल्हा आज भी रात के समय आकर मां शारदा की पूजा करते हैं। यही वजह मानी जाती है कि बंद दरवाजों के बावजूद भीतर से पूजा और घंटियों की ध्वनि सुनाई देती है। इतना ही नहीं, ब्रह्म मुहूर्त में भी मंदिर के आसपास घंटियों की गूंज महसूस की जाती है। जब सुबह पुजारी के कपाट खोलते हैं, तो मां की प्रतिमा पर पहले से ही फूल चढ़े हुए मिलते हैं। श्रद्धालु मानते हैं कि सबसे पहले पूजा करने का सौभाग्य आज भी आल्हा को ही प्राप्त है, जो इस मंदिर की रहस्यमयी आस्था को और भी गहरा बना देता है।
आल्हा और ऊदल कौन थे?
आल्हा और ऊदल को मां शारदा का अनन्य भक्त माना जाता है। मान्यता है कि इनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां ने अमरत्व का वरदान दिया था। आल्हा-उदल को महान योद्धाओं में गिना जाता है। पृथ्वीराज चौहान को युद्ध में करारी शिकस्त दी थी। बाद में गुरु गोरखनाथ के आदेश पर आल्हा ने सन्यास ले लिया था। मंदिर में आज भी आल्हा की तलवार और खड़ाऊ को भक्तों के दर्शन के लिए रखा गया है। पूरे भारत में देवी शारदा का यह मंदिर अपने आप में एकमात्र और बेहद अनोखा है। त्रिकुट पर्वत पर बना यह मंदिर भूमि से 600 फीट की ऊंचाई पर मौजूद है। मंदिर में देवी के दर्शनों के लिए भक्तों को 1000 सीढ़ियों को चढ़कर आना पड़ता है। मंदिर के कपाट बंद होने के बाद घंटियां बजने का रहस्य आज भी जस का तस बना हुआ है।
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त्रिकूट पर्वत पर स्थित अनोखा मंदिर
त्रिकूट पर्वत पर लगभग 600 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर अपनी विशेषता के लिए जाना जाता है। यहां पहुंचने के लिए भक्तों को करीब 1000 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। सबसे रहस्यमयी बात यह है कि मंदिर के कपाट बंद होने के बाद भी घंटियों की आवाज सुनाई देती है, जिसका रहस्य आज तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है। यही कारण है कि यह मंदिर श्रद्धा के साथ-साथ रहस्य का भी अनोखा केंद्र बना हुआ है।
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