Ajmer Congress : नगर निगम अजमेर चुनाव 2026 के बाद कांग्रेस के भीतर जारी खींचतान अब सोशल मीडिया पर खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से व्हाट्सएप और फेसबुक पर की गई पोस्टों ने कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व उपाध्यक्ष एवं राजस्थान अनुसूचित जाति आयोग के पूर्व सदस्य प्रताप सिंह यादव ने कांग्रेस के एक व्हाट्सएप ग्रुप में पोस्ट साझा करते हुए नगर निगम चुनाव में पार्टी की हार को लेकर एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए।
‘धर्मेंद्र राठौड़ को निपटाने के चक्कर में कांग्रेस को नुकसान’
प्रताप यादव ने अपनी पोस्ट में आरोप लगाया कि कथित तौर पर धर्मेंद्र राठौड़ को राजनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिश में अजमेर उत्तर में कांग्रेस को ही नुकसान पहुंचा दिया गया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि पहले कांग्रेस का बोर्ड और मेयर बनने दिया जाना चाहिए था, उसके बाद राजनीतिक मतभेदों का हिसाब किया जा सकता था। यादव ने इसे कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मेहनत के साथ विश्वासघात बताते हुए तीखी नाराजगी जाहिर की। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित नेता की ओर से क्या प्रतिक्रिया आई है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
फेसबुक पोस्ट से क्रॉस वोटिंग का आरोप
प्रताप यादव की व्हाट्सएप पोस्ट के बाद पूर्व पार्षद गीता लखन के पुत्र आजाद लखन ने भी फेसबुक पर एक पोस्ट साझा कर राजनीतिक आरोप लगाए। आजाद लखन ने कथित क्रॉस वोटिंग का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि परिवार के एक सदस्य से भाजपा के पक्ष में मतदान कराया गया। साथ ही उन्होंने धन के लेन-देन और सरकारी ठेका दिलाने के कथित वादे को लेकर भी सवाल खड़े किए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
‘वोट के बदले ठेके का वादा हुआ क्या?’
आजाद लखन ने अपनी फेसबुक पोस्ट में सवाल उठाया कि अगर लगाए जा रहे आरोप सही हैं तो क्या वोट के बदले रिश्तेदारों को सरकारी ठेके दिलाने जैसे वादे किए गए थे। उन्होंने इसे राजनीतिक सिद्धांतों से जुड़ा गंभीर सवाल बताते हुए नेताओं के दोहरे मापदंडों पर भी निशाना साधा।
पायलट समर्थक नेताओं के बीच भी खींचतान की चर्चा
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि प्रताप यादव को सचिन पायलट समर्थक माना जाता है। वहीं जिस नेता पर उन्होंने निशाना साधा है, उसे भी पायलट खेमे से जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे में इस विवाद को लेकर कांग्रेस के भीतर ‘गुट के अंदर गुट’ की स्थिति पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। नगर निगम चुनाव के बाद सामने आ रहे इन आरोप-प्रत्यारोपों ने अजमेर कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को और गर्म कर दिया है।
कार्रवाई पर टिकी नजर
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कांग्रेस नेतृत्व कथित क्रॉस वोटिंग और सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों को लेकर क्या रुख अपनाता है। क्या पार्टी स्तर पर मामले की जांच होगी और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई होगी, इस पर राजनीतिक हलकों की निगाहें टिकी हुई हैं। फिलहाल इतना जरूर है कि अजमेर नगर निगम चुनाव के बाद कांग्रेस की अंदरूनी कलह अब बंद कमरों से निकलकर सोशल मीडिया तक पहुंच गई है और पार्टी की गुटबाजी खुलकर सामने आती दिख रही है।
यह भी देखें –जयपुर में बुलडोजर एक्शन से हड़कंप! न्यू सांगानेर रोड पर डिस्काउंट सेल लगाकर स्टॉक निकाल रहे दुकानदार



