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रुबरू थिएटर की ओर से पुस्तक “सस्सी पुन्नू” का विमोचन, साहित्य और रंगमंच जगत की हस्तियां रहीं मौजूद

Book Launch in delhi

Book Launch : रुबरू थिएटर की ओर से लेखिका काजल सूरी द्वारा लिखित नाटक “सस्सी पुन्नू” पर आधारित पुस्तक का विमोचन नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में किया गया। यह पुस्तक प्रसिद्ध हंस प्रकाशन से प्रकाशित हुई है। कार्यक्रम में साहित्य, रंगमंच, शिक्षा, मीडिया और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व शामिल हुए।

डॉ. प्रताप सहगल ने बताया भारतीय लोक संस्कृति की महत्वपूर्ण गाथा

पुस्तक विमोचन समारोह में मुख्य अतिथियों में शामिल डॉ. प्रताप सहगल, सुप्रसिद्ध लेखक एवं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार ने “सस्सी पुन्नू” को भारतीय उपमहाद्वीप की महत्वपूर्ण लोक प्रेमगाथाओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी लोक कथाएं केवल प्रेम और विरह की कहानी नहीं होतीं, बल्कि इनके भीतर समाज, लोकजीवन और सांस्कृतिक स्मृतियां भी संरक्षित रहती हैं।

लोकगाथाएं साझा सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा: ऋषि कुमार शर्मा

कार्यक्रम में मौजूद ऋषि कुमार शर्मा, पूर्व उप सचिव, हिंदी अकादमी दिल्ली ने पुस्तक और नाटक के सांस्कृतिक पक्ष पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि “सस्सी पुन्नू” जैसी लोकगाथाएं हमारी साझा सांस्कृतिक स्मृति का अभिन्न हिस्सा हैं और इन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।

साहित्यिक संवेदना और नाटकीय संभावनाओं पर हुई चर्चा

सुप्रसिद्ध कवयित्री एवं नाटककार डॉ. सुमन केशरी ने पुस्तक की साहित्यिक संवेदना और नाटकीय संभावनाओं पर विचार रखे। वहीं शिक्षाविद्, नाटककार एवं समाजसेवी डॉ. माधुरी सुबोध ने कहा कि लोककथाएं समाज की सामूहिक स्मृति और जीवन मूल्यों की वाहक होती हैं। उन्होंने पुस्तक और नाटक के माध्यम से प्रेम, समर्पण, मानवीयता और सांस्कृतिक एकता जैसे मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयास की सराहना की।

रंगमंच और साहित्य के बीच सार्थक संवाद: निरुपमा वर्मा

रंगमंच कार्यकर्ता एवं मीडिया कर्मी निरुपमा वर्मा ने पुस्तक के प्रकाशन और नाटक के मंचन को साहित्य और रंगमंच के बीच एक सार्थक संवाद बताया। हंस प्रकाशन की ओर से हरिदर तिवारी ने कहा कि लोककथाएं किसी भी समाज की सामूहिक स्मृति और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं।

प्रस्तावना में कथा और सांस्कृतिक महत्व पर किया गया प्रकाश

पुस्तक की प्रस्तावना डॉ. माधुरी सुबोध और मीडिया कर्मी सुखनंदन बिंद्रा ने लिखी है। दोनों ने अपनी प्रस्तावना में “सस्सी पुन्नू” की कथा, इसके सांस्कृतिक महत्व और वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किए हैं।

नाटक से पुस्तक तक पहुंची लोकगाथा 

काजल सूरी की यह पुस्तक हंस प्रकाशन से प्रकाशित होकर लोक संस्कृति और साहित्य को जोड़ने का प्रयास करती है। मंच पर जीवंत हुई “सस्सी पुन्नू” की कथा अब पुस्तक के माध्यम से पाठकों तक पहुंच रही है। यह पहल लोक संस्कृति, साहित्य, रंगमंच और साझा मानवीय विरासत को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रयास बनकर सामने आई है।

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