Earings : पारंपरिक भारतीय झुमके Earings पहनकर पेरिस फैशन वीक के दौरान जब मॉडल रैंप पर उतरी तो सभी की निगाहें कानों में झुमकों की विशेष डिजायन पर पडी। कान में लटकते विशेष झुमको से जहां मॉडल की सुन्दरता में चार चांद लगे वहीं इंटरनेट पर एक नई बहस छिड़ गई। ब्रांड ने इन झुमकों Earings को केवल एक विंटेज एक्सेसरी के रूप में पेश किया, लेकिन भारत से जुड़े इसके इतिहास और कारीगरी का कोई जिक्र नहीं किया गया। यही बहस का कारण बना।
झुमके का 2000 साल पुराना सफर
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार झुमके का इतिहास कोई नया नहीं है, बल्कि इसके प्रमाण लगभग 300 ईसा पूर्व के मिलते हैं। दक्षिण भारत और दक्कन की प्राचीन मंदिर मूर्तिकलाओं में इसकी आकृति देखी जा सकती है। चोल राजवंश के दौरान इसे खास पहचान मिली और आगे चलकर मुगल काल और राजदरबारों के प्रभाव से इसमें कई बदलाव आए। सदियों से यह Earings भारतीय दुल्हनों और श्रृंगार का एक खास हिस्सा रहा है।
भारतीय Earings
इसकी बनावट इसे दुनिया की दूसरी Earings से अलग बनाती है। एक झुमके की पहचान उसके घंटीनुमा गुंबद, 3डी- डायमेंशन और पहनने पर उसकी सुंदर लहरदार गति से होती है। आमतौर पर यह एक कान के स्टड से शुरू होता है जो नीचे की ओर गुंबद में बदल जाता है, जिसे मोतियों या रत्नों से सजाया जाता है।
इन्हें पेटेंट नहीं करवाया गया
जानकारों के अनुसार झुमका एक हेरिटेज क्राफ्ट है और कॉपीराइट केवल नए डिजाइन को पेटेंट देता है, सदियों पुराने डिजाइनों की नहीं। इसी तरह, ट्रेडमार्क ब्रांड की रक्षा करते हैं, सांस्कृतिक प्रतीकों की नहीं। हेरिटेज डिजाइनों का सांस्कृतिक महत्व तो बहुत है, लेकिन कानूनी सुरक्षा बहुत कमजोर है, जिससे उन्हें पेटेंट कराना मुश्किल होता है।
भारतीय डिजाइन बने ग्लोबल ट्रेंड
यह पहली बार नहीं है जब किसी इंटरनेशनल ब्रांड्स ने भारत को बिना श्रेय दिए यहां की चीजों को ग्लोबल मंच पर पेश किया है।
प्राडा – कोल्हापुरी चप्पलों को लेदर फ्लैट सैंडल कहा
गुच्ची – भारतीय दस्तार को इंडी फुल टर्बन नाम से पेश किया
लुई विटों – बिना श्रेय दिए ऑटो रिक्शा बैग लॉन्च किया
पश्चिमी देशों ने हमारे दुपट्टे को स्कैंडिनेवियन स्कार्फ और हल्दी वाले दूध को गोल्डन लाट्टे का नाम तक दे दिया।
क्या है इस समस्या का समाधान?
इस समस्या का समाधान म्यूजियम एट्रिब्यूशन जैसी पद्धति में छिपा है। जैसे म्यूजियम किसी कलाकृति के कलाकार, संस्कृति और उसके मूल स्थान का साफ उल्लेख करते हैं, वैसे ही फैशन ब्रांड्स को भी करना चाहिए।



