Healthy lifestyle: मोटापा एक गंभीर बीमारी के साथ बेहतर स्वास्थ्य के लिए खतरा भी है और ये खतरा समय के साथ बढ़ता ही जा रहा है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सभी अधिक वजन और मोटापे के कारण होने वाली चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। गांवों, कस्बाई क्षेत्रों का शहरीकरण, बदलती जीवनशैली, प्रोसेस्ड फूड्स का बढ़ता सेवन और इसकी तुलना में शारीरिक गतिविधियों में कमी के चलते लोगों में मोटापे का जोखिम तेजी से बढ़ता जा रहा है। भारत में हालिया राष्ट्रीय सर्वेक्षणों से संकेत मिलता है कि वयस्कों में मोटापे की दर पिछले एक दशक में लगातार बढ़ी है। इसके कारण क्रॉनिक बीमारियां भी बढ़ी हैं जिस वजह से स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट बताती है कि साल 2022 में दुनिया में हर 8 में से 1 व्यक्ति मोटापे से जूझ रहा था। ये खतरा साल-दर-साल बढ़ता ही जा रहा है। भारतीय आबादी में बढ़ती इस समस्या को लेकर विशेषज्ञों ने अलर्ट किया है।
मोटापे का बढ़ता खतरा
हैदराबाद के एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के विशेषज्ञों ने भारत में बढ़ते मोटापे की समस्या को समझने के लिए एक अध्ययन किया। इसके आधार पर विशेषज्ञों की टीम ने बताया है कि भारतीयों में की जेनेटिक आशंका ज्यादा होती है। इसका मतलब कि जन्म से पहले ही व्यक्ति को कुछ खास जीन विरासत में मिल जाते हैं जो उनमें मोटापे के खतरे को बढ़ाने वाले हो सकते हैं। इस खतरे को कम करने के लिए विशेषज्ञों ने मोटापे की जड़ पर वार करने वाले तरीके के बारे में बताया है।
मोटापे को लेकर डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट
मोटापे की जड़ पर कैसे अटैक किया जाए, इसको लेकर विशेषज्ञों के सुझाव जानने से पहले डब्ल्यूएचओ के उन आंकड़ों पर नजर डाल लेना जरूरी है जो दुनियाभर में बढ़ती इस समस्या की डरावनी छवि प्रस्तुत करता है। दुनिय भर में वयस्कों में मोटापा साल 1990 के बाद से दोगुने से ज्यादा हो गया है। किशोरों का चार गुना बढ़ गया है। साल 2022 में, 18 साल और उससे अधिक उम्र के 2.5 बिलियन (250 करोड़) वयस्क अधिक वजन वाले थे। इनमें से 89 करोड़ मोटापे से जूझ रहे थे। साल 2024 में 5 साल से कम उम्र के 35 मिलियन (3.5 करोड़) बच्चे ज्यादा वजन वाले थे।
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मोटापे के खतरे को कम कैसे करें?
मोटापे के खतरे से निपटने और इसकी जड़ पर वार करने के लिए एआईजी के विशेषज्ञों ने बताया कि अगर हम सभी कम उम्र से ही हेल्दी लाइफस्टाइल पर ध्यान दे लेते हैं तो इससे जेनेटिक खतरों को भी कम किया जा सकता है। खासकर कम उम्र में खान-पान और दिनचर्या में सुधार कर लिया जाए तो इससे मोटापे की समस्या से निपटना आसान हो सकता है। साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित इस रिपोर्ट में विशेषज्ञों की टीम ने मोटापे के जोखिम और समाधान के बारे बताया है। एआईजी हॉस्पिटल्स के चेयरमैन डॉ. डी नागेश्वर रेड्डी ने कहा कि भारतीयों में मोटापा जेनेटिक्स, डाइट और मेटाबोलिक फैक्टर्स के कॉम्बिनेशन से होता है। डाइट में बदलाव और एक्सरसाइज से क्रॉनिक मेटाबोलिक बीमारियों और मोटापे के खतरे को कम किया जा सकता है।
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खराब लाइफस्टाइल और मोटापे वाले जीन
30 साल से कम उम्र के भारतीयों में, खराब लाइफस्टाइल और जीन के कारण उनके मोटे होने की आशंका 16 गुना अधिक देखी जा रही है। श्खराब जीनश् के बावजूद, अगर युवा हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाते हैं, तो यह मोटापे की जड़ को कम करने वाला हो सकता है। विशेषज्ञों ने कहा, आप अपने डीएनए या जेनेटिक्स को तो नहीं बदल नहीं सकते, लेकिन खास डाइट और व्यायाम की मदद से इसके कारण होने वाले असर को जरूर कम कर सकते हैं। मोटापे को रोकने के लिए रिफाइंड कार्बाेहाइड्रेट और सैचुरेटेड फैट चीजें कम खाना आपके लिए मददगार हो सकता है। हम अक्सर जेनेटिक्स को एक तय किस्मत मानते हैं, हालांकि शोध में पाया गया है कि कम उम्र में शरीर की मेटाबोलिक प्लास्टिसिटी, बैलेंस्ड डाइट और फिजिकल एक्टिविटी जैसी हेल्दी आदतें मोटापे से जुड़े जेनिटिक्स के असर शांत करने में मदद करती है।



