Health News : घुटनों में दर्द और खराब होने की समस्या आज कल बहुत ही आम हो गई है. उम्र के साथ घुटनों का दर्द बढ़ जाता है और लोगों को चलने-फिरने में समस्या होती है. अक्सर सभी सोचते हैं कि उम्र बढ़ने या चोट लगने के बाद घुटनों की हड्डियां कभी सही नहीं होती और कार्टिलेज कभी वापस नहीं आता. इसकी वजह से दर्द, थकान और कभी-कभी ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी परेशानियां भी शुरू हो जाती हैं. Health News. लोग सोचते हैं कि ‘अब कुछ नहीं होगा, घुटने पुराने हो गए.’ अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो आपको सोच को गलत साबित करने वाला एक खुलासा हुआ है, जो घुटनों की समस्या से एक ही इंजेक्शन में निजात दिला सकता है. स्टैनफोर्ड मेडिसिन के रिसर्चर्स की नई खोज इस सोच को पूरी तरह बदल सकती है.
Health News रिसर्चर्स का कहना है कि आपके घुटने खुद को फिर से ठीक करने की क्षमता रखते हैं, यानी घुटनों की हड्डियां और कार्टिलेज कुछ हद तक खुद को रिपेयर कर सकते हैं. इसका मतलब ये हुआ कि चोट लगने के बाद खराब हुए आपके घुटने या उम्र बढ़ने की वजह से घुटनों में आई समस्याओं को ठीक किया जा सकता है. ये खोज ना सिर्फ घुटनों के दर्द से राहत दिला सकती है, बल्कि भविष्य में ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी समस्याओं के इलाज के नए रास्ते भी खोल सकती है.
Health: प्रोटीन है जिम्मेदार
चूहों पर की गई इस रिसर्च में पाया गया कि शरीर में एक प्रोटीन 15-हाइड्रॉक्सी प्रॉस्टाग्लैंडिन डीहाइड्रोजनेज (15-PGDH) उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है और कार्टिलेज को कमजोर करता है.
रिसर्चर्स ने इस प्रोटीन को ब्लॉक किया और जो नतीजा सामने आया वो चौंकाने वाला था. बूढ़े हो चुके चूहे के घुटनों में कार्टिलेज फिर से मोटा हुआ और जिस चूहे को चोट लगी थी उसे ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या नहीं हुई.
बता दें, कार्टिलेज हड्डियों के बीच एक तरह का सॉफ्ट और कुशन(गद्देदार) जैसा पदार्थ होता है. इसे आप हड्डियों के पैड या कुशन की तरह समझ सकते हैं. ये हमारे घुटनों, कोहनियों, कंधों और जोड़ों में होता है और हड्डियों को आपस में रगड़ने से बचाता है. इसकी वजह से आप चल सकते हैं, दौड़ सकते हैं और जोड़ों को चोट या घिसावट से बचा सकते हैं.
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खुद ही कैसे ठीक होता है कार्टिलेज?
कार्टिलेज को ठीक होने के लिए बाहर से स्टेम सेल्स की जरूरत नहीं पड़ती. आपके घुटनों में पहले से मौजूद सेल्स, जिन्हें कॉनड्रोसाइट्स कहा जाता है, खुद कार्टिलेज को रिपेयर करने का काम करते हैं. रिसर्च में पाया गया कि जब 15-PGDH नाम के एंजाइम को रोका गया, तो ये कॉनड्रोसाइट्स सूजन पैदा करने और कार्टिलेज को नुकसान पहुंचाने वाला काम बंद कर देते हैं. इसके बजाय वो फिर से हेल्दी, मजबूत कार्टिलेज बनाने लगते हैं.
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बदल सकता है ऑस्टियोआर्थराइटिस का इलाज
ऑस्टियोआर्थराइटिस एक ऐसी बीमारी बन गई है, जिससे हर पांचवां एडल्ट प्रभावित है. अभी तक इसका कोई इलाज नहीं है, केवल दर्द कम करने की दवाइयां दी जाती हैं और गंभीर मामलों में सर्जरी करनी पड़ती है. लेकिन इस नए तरीके से कार्टिलेज टूटने का मूल कारण ही बंद हो सकता है. इसका मतलब है कि बीमारी धीरे या रुक सकती है, और शायद घुटने खुद से ठीक भी हो जाएं. ये कहना गलत नहीं होगा कि भविष्य में घुटनों की सर्जरी बिल्कुल बंद हो सकती है और सिर्फ एक इंजेक्शन से ही आस्टियोआर्थराइटिस का इलाज संभव हो सकता है.



