जयपुर : राज्य के सरकारी स्कूलों की प्रार्थना सभा अब न्यूज़ क्लासरुम बनेगी. इस संबंध में शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर प्रार्थना सभा में अखबार पढ़ना और समसामयिक चर्चा को अनिवार्य कर दिया. पढ़ने की आदत, भाषा-ज्ञान, स्कूलों में हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओं में अखबार होने की अनिवार्यता की गई है. जिस कक्षा को समाचार पढ़ने की जिम्मेदारी दी जाएगी, उसके विद्यार्थियों को स्कूल समय से 30 मिनट पहले पहुंचकर महत्वपूर्ण खबरों का चयन करना होगा. यही छात्र प्रार्थना सभा में समाचार पढ़ेंगे ताकि उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व और प्रस्तुतीकरण कौशल विकसित हो. हालांकि इस आदेश में नो बेग डे’ सत्ता की गतिविधियों’ पर चर्चा के निर्देश ने शिक्षा के राजनीतिकरण को लेकर नई बहस छेड़ दी.
नो बेग डे और विवाद की जड़ः
शिक्षा विभाग के आदेश का सबसे चर्चित बिंदु नो बेग डे से जुड़ा है. निर्देशों में कहा कि इस दिन विद्यार्थियों से सत्ता की गतिविधियों पर चर्चा कराई जाए. विभाग का दावा है कि इससे छात्र प्रशासनिक कार्यप्रणाली और नागरिक जिम्मेदारियों को बेहतर समझ पाएंगे.
शिक्षक संगठनों ने भी उठाए सवालः
हालांकि नो बेग डे की शुरुआत रचनात्मक और तनावमुक्त सीख के लिए हुई थी, लेकिन कहीं ये दिन राजनीतिक मंच में न बदल जाए. इस पर शिक्षक संघ शेखावत के प्रदेश अध्यक्ष महावीर सिहाग ने तीखी आपत्ति जताते हुए कहा कि छव ठंह क्ंल पर सत्ता की गतिविधियों पर चर्चा से क्या सरकार विद्यार्थियों को केवल ’प्रजा’ बनाना चाहती है ? शिक्षा का उद्देश्य तार्किक सोच, वैज्ञानिक दृष्टि और विश्लेषण क्षमता विकसित करना है, न कि सामंती मानसिकता को बढ़ावा देना. संघ ने इस निर्देश को वापस लेने की मांग की. वहीं शिक्षक संघ एकीकृत के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रणजीत मीणा ने बताया कि अखबार और पत्रिकाओं का पठन स्वागत योग्य है. स्कूलों में प्रार्थना सभा और लास्ट पीरियड में पूर्व में भी ये गतिविधि हो रही है, लेकिन स्कूलों में राजनीतिक गतिविधियों की चर्चा उचित नहीं. उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जहां-जहां राजनीति ने शिक्षा में प्रवेश किया, वहां पढ़ाई का स्तर गिरा है.



