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राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था में बदलाव, हर माह तय होगी रैंकिंग, कमजोर स्कूलों को मिलेगा ‘रेड स्कूल’ टैग

Education system

Education System :  राजस्थान के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव को लेकर एक योजना पर अमल होने जा रहा है जिसके तहत हर माह शिक्षा व्यवस्था की रैकिंग तय होगी। अब केवल स्कूलों का निरीक्षण, बैठक और निर्देशों से काम नहीं चलेगा। हर महीने यह भी तय होगा कि शिक्षा व्यवस्था ने कितना काम किया। स्कूलों में उपस्थिति से लेकर विद्यार्थियों के सीबीए परिणाम, अधिकारियों की विजिट, शिक्षकों के डिजिटल टूल के इस्तेमाल और मूलभूत सुविधाओं तक छह पैमानों पर जिलों का प्रदर्शन मापा जाएगा और उसके आधार पर मासिक रैंकिंग जारी होगी।

स्कूलों को रेड स्कूल का चिन्ह

जानकारी के अनुसार शिक्षा विभाग शैक्षणिक सत्र 2026-27 में लागू किए गए नए विद्यालय गवर्नेंस ढांचे ने शिक्षा व्यवस्था की निगरानी को डेटा, डिजिटल ट्रैकिंग और जवाबदेही से जोड़ दिया है। पीईईओ से लेकर संयुक्त निदेशक स्तर तक अधिकारियों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं। सबसे कमजोर प्रदर्शन वाले स्कूलों को ‘रेड स्कूल’ के रूप में चिन्हित किया जाएगा और उन्हें सुधारने की जिम्मेदारी सीधे अधिकारियों की होगी।

जिले की भी बनेगी हर माह रैंकिंग

शिक्षा विभाग के अनुसार शाला दर्पण पोर्टल पर हर माह पांचवें कार्य दिवस को जिला रैंकिंग जारी की जाएगी। इसमें छह मापदंडों को अलग-अलग भार दिया गया है। सबसे ज्यादा 25 प्रतिशत वेटेज छात्र उपस्थिति का है। इसके बाद 20 प्रतिशत सीबीए परिणाम, 20 प्रतिशत शाला संबलन विजिट, 15 प्रतिशत शिक्षक एप का उपयोग, 10 प्रतिशत समीक्षा बैठकों की कार्यवाही और 10 प्रतिशत मूलभूत सुविधाओं के लिए निर्धारित हैं। किसी जिले का प्रदर्शन अब केवल परीक्षा परिणाम से तय नहीं होगा। बच्चे नियमित स्कूल आ रहे हैं या नहीं। अधिकारियों ने स्कूलों का कितना संबलन किया। शिक्षक डिजिटल लेसन प्लान और एप का कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। समीक्षा बैठकों की कार्यवाही समय पर दर्ज हुई या नहीं और स्कूलों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं, हर पहलू रैंकिंग को प्रभावित करेगा।

बैठक का डिजिटल हिसाब भी देना होगा

नई व्यवस्था में समीक्षा बैठकों का भी सप्ताहवार कैलेंडर तय किया गया है। पहले सप्ताह सीबीईओ की अध्यक्षता में ब्लॉक स्तरीय समीक्षा बैठक होगी। दूसरे सप्ताह सीडीईओ की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक, तीसरे सप्ताह संयुक्त निदेशक की अध्यक्षता में संभाग स्तरीय जोनल रिव्यू और चौथे सप्ताह अतिरिक्त मुख्य सचिव/निदेशक स्तर पर राज्य स्तरीय समीक्षा होगी। बैठक हो गई, इतना काफी नहीं होगा। उसकी कार्यवाही यानी एमओएम को हर माह 25 तारीख तक शाला दर्पण के डीआरएम/बीआरएम मॉड्यूल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। तय समय तक कार्यवाही दर्ज नहीं हुई, तो जिला रैंकिंग में शून्य अंक का प्रावधान है।

रेड स्कूल का मतलब कार्रवाई नही

जानकारी के अनुसार नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कमजोर स्कूलों को लेकर है। निर्धारित शैक्षणिक परिणाम, बोर्ड परीक्षा परिणाम और छात्र उपस्थिति जैसे संकेतकों के आधार पर कमजोर विद्यालयों को रेड स्कूल के रूप में चिन्हित किया जाएगा। इन स्कूलों को केवल खराब प्रदर्शन की सूची में शामिल करके छोड़ने के बजाय पीईईओ से ऊपर के अधिकारियों को पांच से छह रेड स्कूल गोद दिए जाएंगे। ताकि वे इन्हें सुधार सकें। नियमित संबलन विजिट के साथ साप्ताहिक वीडियो कॉल के जरिए प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

निरीक्षण में मिली कमी, तो बनेगा डिजिटल ‘टिकट’

नई व्यवस्था में निरीक्षण का मतलब केवल रिपोर्ट बनाकर आगे बढ़ जाना नहीं होगा। संबलन एप 2.0 के माध्यम से अधिकारियों के भौतिक निरीक्षण के लक्ष्य तय किए गए हैं। निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली कमियों के लिए डिजिटल टिकट जनरेट होंगे। स्कूल स्तर की कमियों को संस्था प्रधान दूर करेंगे। वहीं मरम्मत, शिक्षक या अन्य संसाधनों से जुड़ी विभागीय कमियों के समाधान की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की होगी।

नई गवर्नेंस व्यवस्था को इस तरह समझें

डेटा में कमी दिखी तो कारण तलाशा जाएगा। निरीक्षण में कमी मिली तो डिजिटल टिकट बनेगा।जिम्मेदार अधिकारी तय होगा। समाधान होगा। भौतिक सत्यापन होगा। फिर टिकट क्लोज होगा। शिक्षा विभाग ने निगरानी की पूरी प्रक्रिया को आंकड़ों और डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ दिया है। इससे बैठकों, निरीक्षणों और स्कूलों की कमियों का हिसाब दर्ज रहेगा।

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