Highcourt : राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर में 18 साल पहले हुए सीरियल बम धमाकों के सिलसिले में गिरफ्तार दो आतंकियों की स्टे याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस भुवन गोयल की बैंच के दोनों आतंकियों को फिलहाल राहत देने से इनकार करने पर इन्हें जेल में ही रहना पड़ेगा।
यह था मामला
जयपुर की विशेष कोर्ट ने 4 अप्रेल 2025 को आतंकी सैफुर्रहमान, मोहम्मद सैफ, मोहम्मद सरवर आजमी और शाहबाज अहमद को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। 13 मई को 2008 को जयपुर में 8 सीरियल ब्लास्ट हुए थे। 9वां बम चांदपोल बाजार के गेस्ट हाउस के पास मिला था। बम फटने के 15 मिनट पहले इसे डिफ्यूज कर दिया गया था। धमाकों में 71 लोगों की मौत हुई थी और 185 घायल हुए थे।
यह भी पढ़ें : राजस्थान में जनगणना का ‘महा-अभियान’ शुरू, CM भजनलाल ने स्व-गणना फॉर्म भर कर की शुरुआत
आतंकियों ने दिया तर्क – 8 केस में हम बरी हो चुके है
राजस्थान हाईकोर्ट में दी याचिका में दोनों आतंकियों की ओर से कहा गया कि ब्लास्ट के 8 मामलों में ट्रायल कोर्ट ने हमें फांसी की सजा सुनाई थी लेकिन हाईकोर्ट ने उस सजा को रद्द करते हुए हमें बरी कर दिया था। जिंदा बम मिलने के मामले में भी वहीं सबूत और तथ्य अभियोजन की ओर से पेश किए गए हैं। जब समान मामलों में हमें बरी किया जा चुका है, तो फिर ट्रायल कोर्ट उन्हीं तथ्यों के आधार पर सजा कैसे दे सकता हैं? उन्होंने कहा कि हम लंबे समय से जेल में है। इस मामले की अपील पर सुनवाई में लंबा समय लगेगा, ऐसे में जमानत का लाभ दिया जाए।
सरकार ने कहा-अतिरिक्त सबूत पेश किए
सरकार की ओर से पैरवी करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी, अधिवक्ता अमन अग्रवाल और नेहा गोयल ने कहा कि आतंकियों का मुख्य काम आतंक फैलाना होता है। इन लोगों ने ब्लास्ट दो न्यूज चैनलों को मेल करके ब्लास्ट की जिम्मेदारी ली थी। इस केस में हमने उस मेल को रिकवर करने सहित अतिरिक्त सबूत पेश किए हैं। जिनके आधार पर ट्रायल कोर्ट ने इन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई हैं।
यह भी देखें : पश्चिम बंगाल में किसकी सरकार? फलौदी सट्टा बाजार ने बढ़ाई धड़कनें | Assam में BJP की हैट्रिक?



