उत्तर प्रदेश के अमेठी से पुलिस विभाग को कठघरे में खड़ा करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक युवक ने पुलिस पर जबरन थाने ले जाकर मारपीट करने और ससुराल से मिली कीमती सोने की अंगूठी गायब करने का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि न्याय न मिलने पर उसने मानवाधिकार आयोग और मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है।
यह मामला कानून की रखवाली करने वाली व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर रहा है।
जबरन उठाकर थाने ले जाने का आरोप
पीड़ित युवक के मुताबिक, वह 9 दिसंबर को अपने एक परिचित के साथ जगदीशपुर बाजार गया था। शाम करीब 5 बजे अचानक एक स्कॉर्पियो गाड़ी वहां पहुंची, जिसमें सवार लोगों ने उसे जबरन उठाकर अमेठी कोतवाली पहुंचा दिया।
युवक का आरोप है कि थाने पहुंचते ही उसके साथ मारपीट की गई और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
सोने की अंगूठी चोरी का दावा
पीड़ित ने बताया कि उसे ससुराल पक्ष से करीब 4 ग्राम वजनी सोने की अंगूठी मिली थी, जो उसके लिए भावनात्मक और आर्थिक रूप से बेहद कीमती है। युवक का कहना है कि थाने में पिटाई के दौरान वही अंगूठी गायब हो गई।
उसका आरोप है कि जब उसने अंगूठी वापस मांगी, तो उसे टाल दिया गया और बाद में चुप रहने के बदले चांदी की अंगूठी देकर समझौते का दबाव बनाया गया।
थाने के चक्कर, फिर भी नहीं मिला न्याय
पीड़ित युवक का कहना है कि वह कई बार थाने के चक्कर काट चुका है, लेकिन न तो उसकी शिकायत दर्ज की गई और न ही कोई ठोस कार्रवाई हुई। उल्टा उसे धमकाया गया।
न्याय न मिलने से परेशान होकर युवक ने मानवाधिकार आयोग और मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है।
पुलिस ने आरोपों को बताया निराधार
वहीं, इस मामले में पुलिस की ओर से सफाई दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि युवक को एक मामले में पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया था। अंगूठी चोरी और मारपीट के आरोपों को पुलिस ने निराधार बताया है।
आगे क्या?
अब इस पूरे मामले की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आ पाएगी। सवाल यह है कि अगर आरोप सही हैं तो दोषियों पर कार्रवाई कब होगी, और अगर गलत हैं तो पीड़ित को न्याय कैसे मिलेगा?



