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राहुल गांधी की सदस्यता खत्म करने की उठी मांग, सरकार नहीं लाएगी विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव

Rahul and PM

Parliament Session: देश की सियासत में राहुल गांधी चर्चा के केन्द्र में आ गए हैं। बजट पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने चीनी सेना के भारतीय सीमा में घुसने पर पीएम मोदी के रुख और अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर भी पीएम मोदी पर गंभीर आरोप लगाए जिससे पक्ष और विपक्ष के साथ साथ देशभर में राहुल गांधी और भाजपा नेताओं के बीच बयानबाजी, विरोध जताया जा रहा है वहीं गुरुवार को लोकसभा में प्रश्नकाल हंगामे के कारण नहीं चल सका। 11 बजे सदन शुरू होते ही विपक्ष ने हंगामा कर दिया। सांसद प्ले कार्ड और पोस्टर लेकर वेल में पहुंच गए। नारेबाजी भी होती रही।

स्पीकर चेयर पर मौजूद केपी तेन्नेटी ने 7 मिनट के बाद ही सदन को स्थगित कर दिया। दोपहर 12 बजे लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई।

राहुल गांधी की सदस्यता समाप्त की मांग

इधर, भाजपा सासंद सांसद निशिकांत दुबे ने गुरुवार को राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा में सब्सटेंसिव मोशन पेश किया है। राहुल पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया है। दुबे ने राहुल की संसद सदस्यता खत्म करने और चुनाव लड़ने लाइफटाइम बैन लगाने की मांग की है।
सब्सटेंसिव मोशन वह प्रपोजल है, जिस पर सदन सीधे चर्चा करके फैसला ले सकता है। इस मोशन में स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि सदन किसी मुद्दे पर क्या फैसला ले। मोशन पर बहस और वोटिंग हो सकती है। पारित होने पर यह सदन की आधिकारिक राय बन जाती है।

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा राहुल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस नहीं लाएगी। हालांकि, बीजेपी उनके भाषण से आपत्तिजनक हिस्से हटाने को लेकर अब भी अड़ी हुई है। बीजेपी के संजय जायसवाल ने राहुल के बजट चर्चा के दौरान कहे गए कुछ अंशों को रिकॉर्ड से हटाने का औपचारिक नोटिस दिया है।

संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू राहुल गांधी के सरकार पर लगाए आरोपों के खिलाफ प्रिविलेज मोशन लाने की बात कही थी। इससे पहले, संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया है। जिसमें 4 फरवरी को लोकसभा स्पीकर के चैंबर में हंगामे का जिक्र है। रिजिजू ने दावा किया है कि विपक्षी सांसदों ने प्रियंका गांधी की मौजूदगी में गालियां दीं।

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हालांकि प्रियंका गांधी ने कहा कि गालियां देने वाली बात झूठी है। उन्होंने किसी को नहीं उकसाया। वे चुपचाप थीं। आखिर में केवल शांति से अपनी बात रखी थी।

क्या होता है विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव

विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव के जरिए संसद/विधानसभा का कोई सदस्य किसी दूसरे सदस्य, मंत्री या अधिकारी के हाथों सदन के विशेषाधिकारों के उल्लंघन के मुद्दे को सदन में रख सकता है। दरअसल, संविधान के अनुच्छेद 105 में संसद सदस्य के विशेषाधिकारों के बारे में लिखा गया है। ताकि वे बिना दबाव के काम कर सकें।

इन अधिकारों में सदन में बोलने की स्वतंत्रता, किसी बयान पर कोर्ट में मुकदमा न चलना, सही और पूरी जानकारी पाने का अधिकार शामिल है। अगर इन अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो उसे विशेषाधिकार हनन माना जाता है।

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विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव में संबंधित सदस्य लोकसभा/राज्यसभा अध्यक्ष को नोटिस देता है। स्पीकर तय करते हैं कि मामला गंभीर है या नहीं। यदि अनुमति मिलती है, तो इसे विशेषाधिकार समिति को भेजा जाता है। समिति जांच कर रिपोर्ट देती है। सदन कार्रवाई तय करता है।

दोषी पाए जाने पर सदस्य को फटकार, चेतावनी, हिरासत ( रेयर केस में) और सदन से निलंबित किया जा सकता है।

 

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