Swami Avimukteshwaranand: जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गौ माता प्रतिष्ठा संकल्प महासभा को लखनऊ में प्रशासन ने शर्तों के साथ अनुमति दी है. 11 मार्च को कांशीराम स्मृति स्थल पर सभा होगी. जिसको लेकर शंकराचार्य ने कहा कि अहंकार, अहंकार और क्या कारण है? परमिशन इसलिए नहीं दे रहे थे कि ऊहापोह बनी रहे, जनता न आए और लोग सोचते रहें कि कार्यक्रम होगा या नहीं होगा. अब एक दिन पहले अनुमति दे दी गई. एक दिन में कोई रिजर्वेशन नहीं करा सकता और न ही दूर-दराज से लोग आ सकते हैं. पूरे देश से जो लोग आने वाले थे, वे एक दिन में कैसे पहुंच पाएंगे? इसलिए परमिशन को लेकर सस्पेंस बनाए रखा गया और अब जाकर अनुमति दी गई है.
“हम क्या मौन रहने के लिए आयोजन कर रहे हैं”
उन्होंने (Swami Avimukteshwaranand) कहा कि हम क्या मौन रहने के लिए आयोजन कर रहे हैं? जो मौन बैठेंगे। वहां क्या शोक सभा कर रहे हैं. कहो तो शोक सभा कर दें. 15 लाख गाय जो आपने गायब की हैं, आपके कार्यकाल में जो गायब हुई हैं, उनकी शोक सभा कर दें फिर मौन ही रहेंगे हम. आप क्या चाहते हैं? ऐसी शर्तें क्यों लगाते हो? हम अपने मन की पीढ़ा को व्यक्त करने ही तो आ रहे हैं. आप शर्तें लगा रहे हैं कि आप यह मत करिए, वह मत करिए.
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“जो सच्चा हिंदू होगा, वह समय निकालकर आएगा”
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Swami Avimukteshwaranand) ने कहा कि जब हम गाय की रक्षा का मुद्दा लेकर चले हैं, तो आप हमें सहारा क्यों नहीं दे रहे हैं? आपका तो मुद्दा था, आप तो कहते थे कि हम हिंदू पार्टी हैं,आप तो भगवा पहनकर बैठे हुए हैं. जब कोई गाय की रक्षा की मांग लेकर आगे बढ़े, तो सबसे पहले आपको आगे आकर उसका समर्थन करना चाहिए. आप समर्थन क्यों नहीं कर रहे हैं? और अगर कोई दूसरा समर्थन कर रहा है, तो आपको दर्द हो रहा है. हिंदू और गौभक्त हर पार्टी में हैं. हमने तो किसी एक पार्टी को आमंत्रित नहीं किया है. आप आएं, मना कौन करता है. अगर गौमाता के लिए आना है, तो शंकराचार्य जी के साथ सुर में सुर मिलाइए. हमारी किसी से कोई बातचीत नहीं है। हम तो पहले ही कह चुके हैं कि जो सच्चा हिंदू होगा, वह समय निकालकर आएगा, और जो नहीं आ सकेगा, वह जहां है वहीं से शंख बजाएगा. सम्मिलित सभा है. यह सब कल ही पता चलेगा.
“झूठे को रणनीति ज्यादा बनानी पड़ती है”
उन्होंने (Swami Avimukteshwaranand) कहा कि झूठे को रणनीति ज्यादा बनानी पड़ती है. जो सीधा-सच्चा है, उसको क्या रणनीति बनानी है? जो बात है सीधी है, कि हम जाएंगे, 40 दिन बीतेगा, फिर 41वें दिन खड़े होकर, 40 दिन में जो हम लोगों को समझ में आया है इन लोगों के बारे में, वह बताएंगे और साथ ही गौमाता का जो हमारा एजेंडा है, जो हमारा इस समय का अभियान है, जो हमारा आंदोलन है, उसको धर्मयुद्ध में परिणत करने के लिए संखनाद करेंगे.



