Business: देश भर में सोना उछाल पर है। हर दिन इसकी कीमत बढ रही है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी फिलहाल करीब 25 फीसदी है. ऐतिहासिक नजरिए से देखें तो यह स्तर काफी नीचे माना जाता है. 1970 और 1980 के दशक में, जिसे सोने का सुनहरा दौर कहा जाता है, उस समय केंद्रीय बैंक अपने कुल रिज़र्व का 60 से 70 फीसदीः हिस्सा सोने में रखते थे.
दुनिया के सेंट्रल बैंक अब यूएस डॉलर पर निर्भरता कम कर रहे हैं. यूएस डॉलर की हिस्सेदारी 2000 के दशक में 60 फीसदी तक पहुंची थी, लेकिन अब घट रही है. इसके बजाय सोने की हिस्सेदारी बढ़ रही है. ऐसे में माना जा रहा है कि एक बार फिर इतिहास दोहराया जा सकता है. अगर सेंट्रल बैंक अपने सोने के रिजर्व को फिर से 60-70ः तक ले जाते हैं तो सोने की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है. एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि अभी सोना 5,000 के आसपास है, लेकिन अगर ये ट्रेंड तेज हुआ तो कीमतें आसमान छू सकती हैं.
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चांदी के लिए भी बड़ा मौका
सोने के बुल मार्केट में चांदी हमेशा उछलती है. पिछले बुल मार्केट में चांदी ने सोने से कहीं ज्यादा तेज रिटर्न दिए. अगर सोना 5,000 डॉलर से आगे जाता है, तो चांदी 100 डॉलर तक पहुंचना शुरुआती दौर ही माना जाएगा.
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भारतीय निवेशकों के लिए क्या मतलब?
भारत में सोना सिर्फ ज्वेलरी नहीं, बल्कि बचत और निवेश का सबसे भरोसेमंद तरीका है.सेंट्रल बैंक अगर सोने में हिस्सेदारी बढ़ाते रहे, तो आने वाले सालों में सोने की कीमतों में भारी तेजी आ सकती है.
अगर आप सोना खरीदने की सोच रहे हैं, तो लंबी अवधि के लिए ये मौका हो सकता है. वहीं चांदी भी सोने के साथ तेज उछाल दे सकती है.



