– मुकेश मिश्रा की विशेष रिपोर्ट –
SIR Politics : वोटर लिस्ट की सफाई हो रही है…मृतकों के नाम हटेंगे…डुप्लीकेट नाम हटेंगे…अपात्र नामों की जांच होगी…और सबसे बड़ी बात—ECI का कहना है कि कोई पात्र नागरिक छूटना नहीं चाहिए और कोई अपात्र व्यक्ति वोटर लिस्ट में नहीं रहना चाहिए। लेकिन साहब…SIR शुरू क्या हुआ… सियासत का तापमान बढ़ गया!….कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेता सवाल उठा रहे हैं…कहीं SIR को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया जा रहा है…कहीं चुनाव आयोग पर सवाल…तो सवाल सीधा है—अगर आपका वोटर पक्का है…आपकी नागरिकता पक्की है…और आपका नाम सही है…तो फिर वोटर लिस्ट की जांच से इतनी बेचैनी क्यों?…क्या असली चिंता पात्र मतदाता की है?…या चिंता ये है कि जांच के बाद…किसका वोट बचेगा…किसका वोट कटेगा…और किसका वोट बैंक कमजोर होगा?
वोटर लिस्ट साफ लेकिन सियासत गंदी
यहाँ वोटर लिस्ट साफ हो रही है लेकिन सियासत क्यों गंदी हो रही है …SIR यानी Special Intensive Revision…नाम बड़ा है…काम सीधा है—वोटर लिस्ट की जांच।ECI के मुताबिक इसका घोषित उद्देश्य है—“No eligible citizen is left out… No ineligible person is included.” मतलब…पात्र भारतीय का वोट रहे…अपात्र का वोट न रहे। अब इसमें किसी को परेशानी होनी चाहिए?…यही सवाल है। लेकिन राजनीति में मामला इतना सीधा कहां होता है!…क्योंकि वोटर लिस्ट सिर्फ कागज नहीं…चुनाव की पूरी गणित है। एक नाम जुड़ा…एक वोट बढ़ा।एक नाम कटा…एक वोट घटा। और जब मामला करोड़ों मतदाताओं की सूची का हो…तो सियासत का हिसाब-किताब भी शुरू होना तय है।
घुसपैठिए का वोट…या नागरिक का अधिकार?
अब सामने आता है सबसे संवेदनशील सवाल। “घुसपैठिए का वोट…या नागरिक का अधिकार?” …. आखिर बड़ी बात क्या है …..जबकि भारत में मतदाता बनने के लिए भारतीय नागरिक होना जरूरी है। ECI भी यही पात्रता बताता है।…तो अगर कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं है…तो सवाल है—उसे वोटर लिस्ट में होना चाहिए या नहीं?…जवाब कानून तय करेगा…ECI की प्रक्रिया तय करेगी…और जरूरत पड़ी तो न्यायिक प्रक्रिया भी। लेकिन राजनीतिक सवाल ये है—जब अपात्र नामों की जांच होती है तो विरोध क्यों?…और दूसरी तरफ…अगर किसी पात्र भारतीय का नाम गलती से हटता है…तो उसकी चिंता भी उतनी ही गंभीर है।….यानी मामला एकतरफा नहीं। …अपात्र बाहर हों…पात्र अंदर रहें…यही इस पूरी प्रक्रिया की असली परीक्षा है।
चुनाव आयोग की भूमिका पर गंभीर सवाल
यानी दोनों पक्षों की अपनी-अपनी दलील है।लेकिन राजनीति का तीसरा पहलू भी है—वोट बैंक। क्योंकि चुनावी राजनीति में हर पार्टी जानती है…वोटर लिस्ट में बदलाव का असर चुनावी गणित पर पड़ सकता है। यही वजह है कि SIR अब सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रहा…राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने SIR और चुनाव आयोग की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सितंबर 2026 में आयोग के भीतर SIR को लेकर कथित असहमति की रिपोर्ट पर भी विपक्ष ने सवाल उठाए।राहुल गांधी ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने ऐसी रिपोर्टों पर कहा कि उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए जाते हैं। तो अब सवाल—क्या विपक्ष की चिंता मतदाता के अधिकार की है?…अगर हां…तो पात्र मतदाता के नाम कटने का एक-एक मामला सामने लाइए। जांच कराइए। आपत्ति दर्ज कराइए। कानूनी रास्ता अपनाइए। लेकिन…अगर बहस सिर्फ इस बात पर हो कि जांच ही क्यों हो रही है? …तो सवाल उठना स्वाभाविक है—वोटर लिस्ट की जांच से समस्या क्या है?
लोकतंत्र में सवाल पूछना जरूरी
नाम वोटर लिस्ट में है…नागरिकता सही है…पता सही है…उम्र सही है…रिकॉर्ड सही है…तो SIR देखकर डरने की जरूरत क्या है?…और अगर रिकॉर्ड में गड़बड़ी है…तो उसे ठीक होना चाहिए या नहीं?….अगर डुप्लीकेट नाम है…तो एक व्यक्ति दो वोट क्यों?…अगर मृत व्यक्ति का नाम है…तो वह वोट कौन डाल रहा था?…अगर अपात्र व्यक्ति का नाम है…तो वह सूची में आया कैसे?…सवाल कठिन हैं… लेकिन लोकतंत्र में सवाल पूछना जरूरी है।और यही सवाल सत्ता से भी पूछे जाने चाहिए…और विपक्ष से भी। SIR में सबसे बड़ी सावधानी यही होनी चाहिए कि किसी पात्र भारतीय मतदाता का नाम गलती से न कटे। क्योंकि वोटर लिस्ट से नाम हटना सिर्फ एक प्रशासनिक गलती नहीं…वोटर के मताधिकार पर सीधा असर हो सकता है।इसीलिए ECI की प्रक्रिया में दावे और आपत्तियों की व्यवस्था है।…ECI के पोर्टल पर SIR से जुड़े नाम खोजने और नोटिस के जवाब/अपील की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।तो विपक्ष अगर पात्र मतदाताओं की चिंता उठा रहा है…वो सवाल लोकतांत्रिक बहस का हिस्सा है।लेकिन फिर दूसरा सवाल भी उतना ही जरूरी है—क्या पात्र मतदाता की चिंता के साथ अपात्र नामों की जांच का समर्थन किया जाएगा?….
मतदाता सूची की प्रक्रिया है SIR
राजस्थान में भी SIR की प्रक्रिया चल चुकी है …यानी…ये सिर्फ BJP की प्रक्रिया नहीं…सिर्फ कांग्रेस की प्रक्रिया नहीं…ये मतदाता सूची की प्रक्रिया है। और इसलिए सवाल दोनों से—अगर नाम गलत है तो बताइए। अगर नाम सही है तो बचाइए।अगर नाम अपात्र है तो हटाइए। लेकिन…सिर्फ राजनीति के लिए SIR को खलनायक बनाना कितना उचित है?…आखिर कांग्रेस और उसके गठबंधन दलों को SIR से डर क्यों लग रहा है …वोटर लिस्ट की जांच से आपत्ति क्यों?…अपात्र नामों की जांच का विरोध क्यों?….पात्र वोटर का नाम कटे तो जिम्मेदार कौन?…घुसपैठिए का वोट किसके हित में?…वोटर अधिकार और वोट बैंक—फर्क कौन करेगा?…क्या SIR पर राजनीति… वोट बैंक की मजबूरी है?
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